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भारत की BRICS अध्यक्षता से समावेशी विश्व व्यवस्था की ओर कदम

प्रधानमंत्री मोदी ने BRICS की अध्यक्षता के दौरान समावेशी विश्व व्यवस्था की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने वैश्विक दक्षिण देशों के लिए नए मंच की अहमियत भी बताई। यह पहल वैश्विक सहयोग को मजबूत करने का एक अवसर है।

14 मई 202614 मई 2026स्रोत: शुक्रवार डेस्क2 बार पढ़ा गया
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण बयान दिया है, जिसमें उन्होंने कहा कि भारत की अध्यक्षता में BRICS (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) समावेशी विश्व व्यवस्था का निर्माण करेगा। यह घोषणा एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में की गई, जो आगामी BRICS शिखर सम्मेलन की तैयारी के संदर्भ में आयोजित किया गया था। इस बयान ने न केवल भारत की वैश्विक भूमिका को उजागर किया, बल्कि यह भी संकेत दिया कि दक्षिण वैश्विक देशों के लिए एक नया मंच स्थापित किया जाएगा।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में BRICS के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह संगठन वैश्विक दक्षिण देशों के लिए एक सशक्त आवाज बनेगा। उन्होंने इस बात की पुष्टि की कि BRICS के सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की दिशा में कई योजनाएं तैयार की जा रही हैं। आंकड़ों के अनुसार, BRICS देशों की जनसंख्या विश्व की लगभग 42 प्रतिशत है, जो इस संगठन की शक्ति को दर्शाता है। इसके अलावा, BRICS के सदस्य देशों की अर्थव्यवस्था भी वैश्विक अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देती है।

BRICS की स्थापना के पीछे एक विचार था कि ये देश एक दूसरे के साथ मिलकर विकास के नए रास्ते खोजें। इस संगठन ने पिछले वर्षों में विभिन्न मुद्दों पर संयुक्त रूप से काम किया है, जैसे कि आर्थिक विकास, जलवायु परिवर्तन, और वैश्विक सुरक्षा। प्रधानमंत्री मोदी के अनुसार, इस समय वैश्विक राजनीति में कई चुनौतियाँ हैं, और BRICS इन चुनौतियों का सामना करने के लिए एक प्रभावी मंच के रूप में उभर सकता है।

इस मामले में भारत सरकार की प्रतिक्रिया सकारात्मक रही है। अधिकारियों ने कहा है कि भारत की अध्यक्षता BRICS को नई ऊंचाई पर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। सरकार ने यह सुनिश्चित करने का वादा किया है कि सभी सदस्य देशों की आवाज़ सुनी जाए और समावेशिता को प्राथमिकता दी जाए। इसके अलावा, भारत ने BRICS के तहत विभिन्न विकासात्मक योजनाओं की घोषणा भी की है, जो सदस्य देशों के लिए लाभकारी सिद्ध होंगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि BRICS की बढ़ती भूमिका अंतरराष्ट्रीय मंच पर महत्वपूर्ण है। कई विशेषज्ञों ने कहा है कि यह संगठन वैश्विक दक्षिण के देशों के लिए एक नया अवसर प्रदान करेगा। इसके साथ ही, वे यह भी मानते हैं कि BRICS के माध्यम से सदस्य देश आपसी सहयोग को बढ़ावा देने में सफल होंगे, जो वैश्विक स्थिरता के लिए आवश्यक है। यह एक ऐसा मंच है, जहां विकासशील देशों की समस्याओं को प्राथमिकता दी जाएगी।

जनता पर इस पहल का प्रभाव सकारात्मक दिखाई देता है। नागरिकों का मानना है कि BRICS के गठन से भारत की अंतरराष्ट्रीय स्थिति मजबूत होगी। इससे न केवल आर्थिक विकास को प्रोत्साहन मिलेगा, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान भी बढ़ेगा। इस प्रकार, यह पहल भारत के लिए एक सुनहरा अवसर बन सकती है, जिससे आम जनता को भी लाभ मिलेगा।

इसके अलावा, BRICS के अंतर्गत विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए कई नई परियोजनाओं की योजना बनाई जा रही है। इनमें व्यापार, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं। इन परियोजनाओं का उद्देश्य न केवल सदस्य देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी सकारात्मक योगदान देना है। यह पहल विकासशील देशों के लिए एक नई दिशा प्रदान कर सकती है।

अंत में, भारत की BRICS अध्यक्षता से वैश्विक राजनीति में सकारात्मक बदलाव की उम्मीद की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह संगठन समावेशी विश्व व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। भविष्य में, BRICS के माध्यम से वैश्विक दक्षिण देशों की आवाज़ को और भी सशक्त बनाया जाएगा। इस प्रकार, यह पहल न केवल भारत के लिए, बल्कि अन्य विकासशील देशों के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

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