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शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर से, 10 दिन तक होगी आराधना

इस वर्ष शारदीय नवरात्र 11 अक्तूबर से शुरू हो रहा है। यह 10 दिन तक चलेगा और अष्टमी की तिथि दो दिन होगी। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, यह दुर्लभ संयोग पिछले 50 वर्षों में केवल छठी बार बन रहा है।

3 अक्टूबर 2026 • 3 अक्टूबर 2026स्रोत: शुक्रवार डेस्क22 बार पढ़ा गया
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इस वर्ष शारदीय नवरात्र 11 अक्तूबर से आरंभ हो रहा है, जो पूरे 10 कैलेंडर दिनों तक मनाया जाएगा। इस दौरान मां दुर्गा की आराधना की जाएगी और भक्तजन विशेष अनुष्ठान करेंगे। नवरात्र का यह पर्व हर वर्ष हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है।

नवरात्र के दौरान भक्तजन विभिन्न प्रकार के व्रत और उपवास रखते हैं। इस वर्ष अष्टमी की तिथि दो दिन होगी, जिससे भक्तों को विशेष लाभ मिलेगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, यह संयोग चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग के साथ जुड़ा हुआ है।

शारदीय नवरात्र का पर्व भारत में विशेष रूप से देवी पूजा के लिए जाना जाता है। यह पर्व मां दुर्गा की आराधना का समय होता है, जिसमें भक्तजन अपने घरों में कलश स्थापित कर पूजा करते हैं। पिछले 50 वर्षों में यह केवल छठी बार है जब ऐसा दुर्लभ संयोग बना है।

इस पर्व के दौरान विभिन्न स्थानों पर मेले और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। भक्तजन अपनी श्रद्धा के अनुसार मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करते हैं। इस वर्ष के नवरात्र में विशेष रूप से चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग का महत्व बताया गया है।

नवरात्र के दौरान लोगों पर इसका गहरा प्रभाव पड़ता है। भक्तजन अपनी आस्था के अनुसार उपवास रखते हैं और मां दुर्गा से आशीर्वाद प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। यह समय परिवार और समाज में एकता और भाईचारे को बढ़ावा देने का भी होता है।

इस पर्व के साथ ही विभिन्न धार्मिक आयोजनों की तैयारी भी शुरू हो गई है। मंदिरों में विशेष सजावट की जा रही है और भक्तजन अपने-अपने तरीके से मां की आराधना करने की योजना बना रहे हैं। इस वर्ष का नवरात्र विशेष रूप से भक्तों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

आगामी दिनों में भक्तजन मां दुर्गा की आराधना में जुट जाएंगे। अष्टमी के दिन विशेष पूजा और हवन का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान भक्तजन मां के प्रति अपनी श्रद्धा और भक्ति प्रकट करेंगे।

शारदीय नवरात्र का पर्व भारतीय संस्कृति में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यह न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि समाज में एकता और प्रेम का संदेश भी देता है। इस पर्व के माध्यम से लोग अपनी आस्था को और भी मजबूत करते हैं।

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