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पूर्वोत्तर में मानसून ने 125 साल का रिकॉर्ड तोड़ा

पूर्वोत्तर भारत में मानसून ने 125 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। 316 जिलों में सूखे जैसे हालात उत्पन्न हुए हैं। अल नीनो के प्रभाव से यह स्थिति और भी गंभीर हो गई है।

1 अक्टूबर 2026 • 1 अक्टूबर 2026स्रोत: शुक्रवार डेस्क24 बार पढ़ा गया
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इस वर्ष मानसून ने पूर्वोत्तर भारत में 125 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। यह घटना हाल ही में हुई है, जिसके परिणामस्वरूप 316 जिलों में सूखे जैसे संकट का सामना करना पड़ रहा है। यह स्थिति विशेष रूप से उन क्षेत्रों में देखी जा रही है, जो पहले से ही जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से प्रभावित हैं।

मानसून के दौरान इस तरह की स्थिति असामान्य मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत अल नीनो का इस संकट में महत्वपूर्ण योगदान है। अल नीनो एक जलवायु पैटर्न है, जो समुद्र की सतह के तापमान में परिवर्तन लाता है और इसके प्रभाव से मौसम में अस्थिरता उत्पन्न होती है।

पिछले कुछ वर्षों में, पूर्वोत्तर भारत में मानसून की बारिश में कमी आई है, जिससे कृषि और जल संसाधनों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। इस बार के मानसून ने पिछले 125 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है, जो इस क्षेत्र के लिए चिंता का विषय है। सूखे जैसी स्थिति ने किसानों और स्थानीय समुदायों के लिए गंभीर चुनौतियाँ उत्पन्न की हैं।

सरकारी अधिकारियों ने इस संकट पर चिंता व्यक्त की है और सूखे से प्रभावित क्षेत्रों के लिए राहत उपायों की योजना बनाने की बात की है। हालांकि, अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति की गंभीरता को देखते हुए त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता है।

इस संकट का प्रभाव स्थानीय लोगों पर गहरा पड़ा है। किसानों को फसल नुकसान का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनकी आजीविका पर संकट आ गया है। इसके अलावा, जल संकट भी उत्पन्न हो गया है, जिससे लोगों को पीने के पानी की कमी का सामना करना पड़ रहा है।

इस बीच, मौसम विभाग ने अल नीनो के प्रभावों पर नजर रखने की बात कही है। इसके अलावा, सरकार ने सूखे से प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों को तेज करने के लिए कदम उठाने की योजना बनाई है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि लोगों को आवश्यक सहायता मिले, राहत सामग्री का वितरण किया जाएगा।

आगे क्या होगा, इस पर सभी की नजरें हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अल नीनो का प्रभाव जारी रहा, तो आने वाले महीनों में स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। इसलिए, सभी संबंधित एजेंसियों को सक्रिय रहने की आवश्यकता है।

संक्षेप में, पूर्वोत्तर भारत में मानसून का यह रिकॉर्ड तोड़ना एक गंभीर संकेत है। यह जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को दर्शाता है और स्थानीय समुदायों के लिए एक बड़ा संकट उत्पन्न कर रहा है। इस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए त्वरित और प्रभावी उपायों की आवश्यकता है।

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