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महाराष्ट्र में गणेशोत्सव का छठा दिन, 21100 प्रतिमाओं का विसर्जन

महाराष्ट्र में गणेशोत्सव का छठा दिन मनाया गया। इस दिन 21100 से अधिक गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। कांग्रेस ने सूखा पीड़ित किसानों की मदद के लिए सरकार से अपील की है।

20 सितंबर 2026 • 20 सितंबर 2026स्रोत: शुक्रवार डेस्क22 बार पढ़ा गया
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महाराष्ट्र में गणेशोत्सव का छठा दिन 27 सितंबर 2023 को मनाया गया। इस अवसर पर राज्य भर में 21100 से अधिक गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। यह उत्सव हर साल धूमधाम से मनाया जाता है और इस दिन विशेष रूप से भक्तों की भीड़ देखने को मिलती है।

गणेशोत्सव के इस छठे दिन, भक्तों ने अपने-अपने घरों से गणेश प्रतिमाओं को लेकर जलाशयों की ओर प्रस्थान किया। विसर्जन के दौरान भक्तों ने भक्ति गीत गाए और भगवान गणेश की आरती की। इस दिन का महत्व भक्तों के लिए विशेष होता है, क्योंकि यह गणेश जी को विदाई देने का समय होता है।

गणेशोत्सव का आयोजन महाराष्ट्र में हर साल बड़े उत्साह के साथ किया जाता है। यह पर्व न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक भी है। इस दौरान लोग एकत्रित होकर मिल-जुलकर उत्सव मनाते हैं, जो समुदाय की एकता को दर्शाता है।

कांग्रेस पार्टी ने इस अवसर पर एक बयान जारी किया है, जिसमें उन्होंने सूखा पीड़ित किसानों की मदद के लिए सरकार से अपील की है। पार्टी का कहना है कि सरकार को किसानों की समस्याओं का समाधान करने के लिए तत्पर रहना चाहिए। यह बयान इस समय की आवश्यकता को दर्शाता है, जब कई किसान सूखे की मार झेल रहे हैं।

इस विसर्जन के दौरान, भक्तों की भीड़ और जश्न का माहौल देखने को मिला। हालांकि, सूखे के कारण किसानों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। ऐसे में कांग्रेस की अपील से यह स्पष्ट होता है कि राजनीतिक दल भी किसानों की समस्याओं पर ध्यान दे रहे हैं।

गणेशोत्सव के बाद, राज्य में विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा किसानों की सहायता के लिए कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं। इसके अलावा, सरकार की ओर से भी सूखा प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों की योजना बनाई जा सकती है।

आने वाले दिनों में, गणेशोत्सव के समापन के बाद, राज्य सरकार की ओर से किसानों के लिए राहत पैकेज की घोषणा की जा सकती है। यह किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम होगा, जिससे उनकी समस्याओं का समाधान हो सकेगा।

इस वर्ष का गणेशोत्सव न केवल धार्मिक उत्सव था, बल्कि यह किसानों की समस्याओं को उजागर करने का भी एक माध्यम बना। कांग्रेस की अपील और किसानों की स्थिति ने इस उत्सव को एक नई दिशा दी है। यह दर्शाता है कि धार्मिक और सामाजिक मुद्दे एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

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