महबूबा मुफ्ती ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35A हटाए जाने की सातवीं वर्षगांठ से एक दिन पहले श्रीनगर में विरोध प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में उन्होंने हाथ में दो झंडे लिए हुए थे। यह घटना 4 अगस्त 2023 को हुई।
प्रदर्शन के दौरान महबूबा मुफ्ती ने जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को वापस लौटाने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह कदम राज्य के लोगों के अधिकारों का उल्लंघन है। इस प्रदर्शन में कई समर्थक भी शामिल हुए, जो उनके साथ नारेबाजी कर रहे थे।
अनुच्छेद 370 और 35A को 5 अगस्त 2019 को हटाया गया था, जिसके बाद जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त हो गया। इस निर्णय के बाद से राज्य में राजनीतिक स्थिति में काफी बदलाव आया है। महबूबा मुफ्ती इस निर्णय के खिलाफ लगातार आवाज उठाती रही हैं।
महबूबा मुफ्ती ने इस प्रदर्शन के दौरान तिरंगे का अपमान होने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यह केवल एक झंडा नहीं, बल्कि हमारे अधिकारों का प्रतीक है। इस पर उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना की।
इस प्रदर्शन का प्रभाव स्थानीय लोगों पर पड़ा है, जो इस मुद्दे को लेकर विभाजित हैं। कुछ लोग महबूबा मुफ्ती के साथ हैं, जबकि अन्य केंद्र सरकार के निर्णय का समर्थन करते हैं। यह स्थिति जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक तनाव को बढ़ा रही है।
इस बीच, जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक गतिविधियाँ तेज हो गई हैं। विभिन्न दलों के नेता इस मुद्दे पर अपने विचार व्यक्त कर रहे हैं। महबूबा मुफ्ती का यह प्रदर्शन एक बार फिर से इस विषय को चर्चा में लाने का प्रयास है।
आगे क्या होगा, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। महबूबा मुफ्ती और उनके समर्थक इस मुद्दे पर और अधिक विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं। इसके अलावा, केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी।
इस प्रदर्शन का महत्व इस बात में है कि यह जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक परिदृश्य को प्रभावित कर सकता है। महबूबा मुफ्ती का यह कदम उनके राजनीतिक संघर्ष को दर्शाता है। अनुच्छेद 370 और 35A के मुद्दे पर स्थानीय लोगों की भावनाएँ अभी भी प्रबल हैं।
