शनिवार, 20 जून 2026भाषा: हिंदी
शुक्रवार डिजिटल
bharat

भारत में हर वर्ष 5,000 करोड़ टन रेत का दोहन

भारत में हर वर्ष 5,000 करोड़ टन रेत का दोहन किया जा रहा है। यह स्थिति नदियों और समुद्री तटों के लिए गंभीर खतरा बन गई है। प्रकृति इस भंडार को पूरा करने में असमर्थ है।

20 जून 20261 घंटे पहलेस्रोत: शुक्रवार डेस्क6 बार पढ़ा गया
WXfT

भारत में हर वर्ष 5,000 करोड़ टन रेत का दोहन किया जा रहा है, जो नदियों और समुद्री तटों के लिए एक गंभीर खतरा बन गया है। यह स्थिति पर्यावरणीय संतुलन को बिगाड़ रही है और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को बढ़ा रही है। यह जानकारी हाल ही में प्रकाशित एक रिपोर्ट में सामने आई है।

रिपोर्ट के अनुसार, रेत का अत्यधिक दोहन नदियों की पारिस्थितिकी को प्रभावित कर रहा है। नदियों का जल स्तर घट रहा है और समुद्री तटों की सुरक्षा भी खतरे में है। रेत का यह दोहन न केवल प्राकृतिक संसाधनों को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि इससे स्थानीय समुदायों की आजीविका भी प्रभावित हो रही है।

इस समस्या का एक बड़ा कारण निर्माण उद्योग की बढ़ती मांग है। रेत का उपयोग भवन निर्माण, सड़क निर्माण और अन्य अवसंरचनात्मक परियोजनाओं में किया जाता है। इसके अलावा, अवैध रेत खनन भी इस समस्या को और बढ़ा रहा है, जिससे पर्यावरणीय नुकसान और अधिक हो रहा है।

सरकारी अधिकारियों ने इस स्थिति पर चिंता व्यक्त की है, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम उठाए जाने की जानकारी नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि रेत के दोहन को नियंत्रित करने के लिए नियमों को सख्त करने की आवश्यकता है। इसके साथ ही, वैकल्पिक सामग्रियों के उपयोग को बढ़ावा देने की बात भी की जा रही है।

इस रेत के दोहन का प्रभाव स्थानीय लोगों पर भी पड़ रहा है। कई समुदायों को जल संकट का सामना करना पड़ रहा है, जबकि अन्य को अपनी आजीविका के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। नदियों के सूखने से मछली पालन और कृषि पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

इस समस्या से निपटने के लिए कुछ संगठनों ने जागरूकता अभियान शुरू किए हैं। ये संगठन लोगों को रेत के दोहन के दुष्प्रभावों के बारे में शिक्षित कर रहे हैं। इसके अलावा, वे वैकल्पिक निर्माण सामग्रियों के उपयोग को भी बढ़ावा दे रहे हैं।

आगे की योजना में रेत के दोहन को नियंत्रित करने के लिए सख्त नियमों का निर्माण करना शामिल है। इसके साथ ही, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है। यदि इस दिशा में कदम नहीं उठाए गए, तो स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।

इस रिपोर्ट से स्पष्ट होता है कि रेत का अत्यधिक दोहन एक गंभीर पर्यावरणीय समस्या है। इसे नियंत्रित करने के लिए ठोस कदम उठाना आवश्यक है, ताकि नदियों और समुद्री तटों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। यह न केवल पर्यावरण के लिए, बल्कि मानव जीवन के लिए भी महत्वपूर्ण है।

टैग:
पर्यावरणरेतभारतजलवायु परिवर्तन
WXfT

bharat की और ख़बरें

और पढ़ें →