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भारत का अगला Elon Musk: 1 लाख करोड़ का प्लान

नीति आयोग के सदस्य प्रोफेसर अभय करंदीकर ने 'अनम्यूट भारत' में बातचीत की। उन्होंने भारत के भविष्य के लिए 1 लाख करोड़ रुपये के प्लान का जिक्र किया। इस योजना का उद्देश्य भारत को वैश्विक तकनीकी क्षेत्र में अग्रणी बनाना है।

12 अगस्त 20261 घंटे पहलेस्रोत: शुक्रवार डेस्क0 बार पढ़ा गया
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हाल ही में 'अनम्यूट भारत' के एक विशेष एपिसोड में नीति आयोग के पूर्णकालिक सदस्य और पूर्व विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सचिव प्रोफेसर अभय करंदीकर ने भारत के भविष्य के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना का खुलासा किया। इस योजना का कुल बजट 1 लाख करोड़ रुपये है। यह योजना भारत को तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में एक प्रमुख शक्ति बनाने के उद्देश्य से तैयार की गई है।

प्रोफेसर करंदीकर ने इस एपिसोड में बताया कि यह योजना विभिन्न तकनीकी क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई है। उन्होंने कहा कि भारत को वैश्विक तकनीकी मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त करने के लिए इस तरह की योजनाओं की आवश्यकता है। इस योजना में स्टार्टअप्स और नवाचारों को प्रोत्साहित करने के लिए कई पहल शामिल हैं।

इस योजना का संदर्भ भारत की तेजी से बदलती तकनीकी परिदृश्य में है, जहाँ देश को नई तकनीकों और नवाचारों के विकास में तेजी लाने की आवश्यकता है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने तकनीकी क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल की हैं, लेकिन अब भी कई चुनौतियाँ शेष हैं। इस योजना का उद्देश्य उन चुनौतियों का समाधान करना है और भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है।

प्रोफेसर करंदीकर ने इस योजना के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह केवल एक आर्थिक योजना नहीं है, बल्कि यह भारत के भविष्य को आकार देने का एक प्रयास है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि तकनीकी नवाचारों के माध्यम से ही भारत को अपनी समस्याओं का समाधान मिल सकता है।

इस योजना का प्रभाव आम लोगों पर भी पड़ सकता है, क्योंकि यह नई नौकरियों और आर्थिक अवसरों का सृजन कर सकती है। तकनीकी क्षेत्र में वृद्धि से युवा पीढ़ी को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। इसके अलावा, यह योजना छोटे और मध्यम उद्यमों को भी लाभान्वित कर सकती है।

इस योजना से संबंधित अन्य विकासों में संभावित निवेशकों की रुचि और तकनीकी कंपनियों के साथ साझेदारी शामिल हो सकती है। इसके अलावा, सरकार द्वारा इस योजना के कार्यान्वयन के लिए आवश्यक नीतिगत बदलाव भी किए जा सकते हैं।

आगे की प्रक्रिया में इस योजना के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा और कार्यान्वयन की योजना बनाई जाएगी। नीति आयोग और अन्य संबंधित संस्थाएँ इस योजना को सफल बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाएँगी। इसके साथ ही, योजना की प्रगति की निगरानी भी की जाएगी।

इस योजना का सारांश यह है कि यह भारत को तकनीकी नवाचारों के क्षेत्र में एक नई दिशा देने का प्रयास है। 1 लाख करोड़ रुपये का यह प्लान भारत के युवा उद्यमियों और नवप्रवर्तकों के लिए एक अवसर प्रस्तुत करता है। यदि यह योजना सफल होती है, तो यह भारत को वैश्विक तकनीकी मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण स्थान दिला सकती है।

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