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केरल में LPST रैंक होल्डर्स का 34 दिन का विरोध

केरल में LPST रैंक होल्डर्स ने 34 दिनों से सड़क पर विरोध प्रदर्शन किया है। उन्होंने सचिवालय के सामने घास खाकर अपना विरोध जताया। यह आंदोलन नौकरी की नियुक्ति की मांग को लेकर है।

8 अगस्त 20262 घंटे पहलेस्रोत: शुक्रवार डेस्क4 बार पढ़ा गया
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केरल में LPST (लोअर प्राइमरी स्कूल टीचर) रैंक होल्डर्स ने 34 दिनों से सड़क पर विरोध प्रदर्शन किया है। यह प्रदर्शन सचिवालय के सामने हो रहा है, जहां प्रदर्शनकारियों ने घास खाकर अपना विरोध जताया। उनका मुख्य उद्देश्य नौकरी की नियुक्ति की मांग करना है।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्हें नौकरी मिली है, लेकिन नियुक्ति नहीं हुई है। इस स्थिति के कारण वे काफी निराश हैं और उन्होंने अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने का निर्णय लिया है। प्रदर्शन में शामिल लोग विभिन्न प्रकार के नारे लगा रहे हैं और अपनी मांगों को लेकर एकजुटता दिखा रहे हैं।

LPST रैंक होल्डर्स का यह आंदोलन उस समय शुरू हुआ जब उन्हें नौकरी के लिए चयनित किया गया, लेकिन नियुक्ति प्रक्रिया में देरी हो गई। यह समस्या कई महीनों से चल रही है और इससे प्रभावित लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है। शिक्षा क्षेत्र में इस प्रकार की नियुक्तियों की प्रक्रिया में अनियमितताओं के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है।

प्रदर्शनकारियों ने सरकार से इस मुद्दे पर ध्यान देने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं होती हैं, तो वे अपने आंदोलन को और तेज करेंगे। इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन प्रदर्शनकारियों की संख्या में वृद्धि हो रही है।

इस आंदोलन का प्रभाव स्थानीय लोगों पर भी पड़ रहा है। लोग प्रदर्शनकारियों के समर्थन में आ रहे हैं और उनकी मांगों को सही ठहरा रहे हैं। इस स्थिति ने शिक्षा क्षेत्र में नियुक्तियों की प्रक्रिया को लेकर चर्चा को भी जन्म दिया है।

इस बीच, कुछ अन्य शिक्षण संस्थानों के छात्रों ने भी इस आंदोलन में भाग लेना शुरू कर दिया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि यह मुद्दा केवल LPST रैंक होल्डर्स तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा क्षेत्र के अन्य छात्रों को भी प्रभावित कर रहा है।

आगे की स्थिति यह है कि यदि सरकार जल्द ही कोई कार्रवाई नहीं करती है, तो प्रदर्शनकारियों ने अपनी गतिविधियों को बढ़ाने की योजना बनाई है। वे अन्य स्थानों पर भी अपने विरोध को फैलाने की सोच रहे हैं।

इस आंदोलन का महत्व इस बात में है कि यह शिक्षा क्षेत्र में नियुक्तियों की प्रक्रिया की अनियमितताओं को उजागर करता है। यदि सरकार इस मुद्दे का समाधान नहीं करती है, तो इससे शिक्षा क्षेत्र में और भी अधिक समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं।

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