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भारत को मिले दो नए MQ-9B सी गार्डियन ड्रोन

भारत की नौसेना को दो MQ-9B सी गार्डियन ड्रोन मिलेंगे। इनकी लागत 1943 करोड़ रुपये है। यह ड्रोन समुद्र में निगरानी क्षमता को बढ़ाएंगे।

17 अगस्त 20261 घंटे पहलेस्रोत: शुक्रवार डेस्क0 बार पढ़ा गया
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भारत की नौसेना को हाल ही में दो MQ-9B सी गार्डियन ड्रोन मिलने की घोषणा की गई है। यह सौदा जनरल एटॉमिक्स के साथ किया गया है और इसकी कुल लागत 1943 करोड़ रुपये है। ये ड्रोन समुद्र में निगरानी और सुरक्षा को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण साबित होंगे।

MQ-9B सी गार्डियन ड्रोन की विशेषताएँ इसे समुद्री निगरानी के लिए अत्यधिक सक्षम बनाती हैं। ये ड्रोन लंबी दूरी तक उड़ान भरने और उच्च ऊँचाई पर स्थिर रहने की क्षमता रखते हैं। इसके अलावा, ये विभिन्न प्रकार के सेंसर और हथियारों से लैस हैं, जो इन्हें विभिन्न मिशनों के लिए उपयुक्त बनाते हैं।

भारत की नौसेना के लिए यह ड्रोन एक महत्वपूर्ण तकनीकी उन्नति का प्रतीक हैं। समुद्र में सुरक्षा और निगरानी के लिए यह ड्रोन अत्यधिक उपयोगी होंगे, खासकर भारत के समुद्री सीमाओं की रक्षा में। इससे भारत की समुद्री रणनीति में भी बदलाव आएगा।

इस सौदे पर आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी तक नहीं आई है। लेकिन यह स्पष्ट है कि भारत की रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने के लिए यह एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे भारत की नौसेना की सामरिक स्थिति में सुधार होगा।

इन ड्रोन के आने से समुद्र में रहने वाले लोगों की सुरक्षा में भी सुधार होगा। यह ड्रोन समुद्री अपराधों, जैसे कि तस्करी और समुद्री डाकुओं के खिलाफ निगरानी में मदद करेंगे। इससे स्थानीय मछुआरों और समुद्री व्यापारियों को भी सुरक्षा का एहसास होगा।

इसके अलावा, भारत की नौसेना के लिए यह ड्रोन अन्य देशों के साथ सहयोग और साझेदारी को भी बढ़ावा देंगे। इससे भारत की समुद्री सुरक्षा में और मजबूती आएगी। यह सौदा भारत के रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में भी एक कदम है।

आगे की योजना के तहत, भारत की नौसेना इन ड्रोन का उपयोग विभिन्न प्रकार के मिशनों के लिए करेगी। इसके अलावा, इनकी तकनीकी क्षमताओं का विकास भी किया जाएगा। इससे भारत की समुद्री सुरक्षा और निगरानी प्रणाली में और सुधार होगा।

कुल मिलाकर, MQ-9B सी गार्डियन ड्रोन का यह सौदा भारत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह न केवल नौसेना की क्षमताओं को बढ़ाएगा, बल्कि समुद्री सुरक्षा को भी मजबूत करेगा। इस प्रकार, यह सौदा भारत की रक्षा रणनीति में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।

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