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राहुल गांधी ने NEET मामले पर सरकार को घेरा

राहुल गांधी ने NEET मामले में सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने प्रधान के इस्तीफे की मांग की है। 22 लाख बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता व्यक्त की गई।

24 मई 20268 घंटे पहलेस्रोत: शुक्रवार डेस्क2 बार पढ़ा गया
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कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने हाल ही में NEET मामले को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि जब तक प्रधान मंत्री का इस्तीफा नहीं होता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। यह बयान उन्होंने एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान दिया, जिसमें उन्होंने 22 लाख बच्चों के भविष्य को दांव पर लगाने का आरोप लगाया।

राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि NEET परीक्षा में अनियमितताएँ और समस्याएँ हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह परीक्षा बच्चों के भविष्य को प्रभावित कर रही है और सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए। उनके अनुसार, यह मामला केवल एक परीक्षा का नहीं, बल्कि लाखों बच्चों के सपनों का है।

NEET परीक्षा, जो चिकित्सा प्रवेश के लिए आवश्यक है, पिछले कुछ वर्षों में विवादों में रही है। कई छात्र और अभिभावक इस परीक्षा को लेकर अपनी चिंताओं को व्यक्त कर चुके हैं। राहुल गांधी ने इस संदर्भ में सरकार की निष्क्रियता पर सवाल उठाया और इसे बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताया।

सरकार की ओर से इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, राहुल गांधी के बयान ने इस विषय को फिर से गरम कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक उचित कदम नहीं उठाए जाते, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

इस मुद्दे का प्रभाव सीधे तौर पर उन 22 लाख बच्चों पर पड़ रहा है, जो NEET परीक्षा में शामिल होते हैं। अभिभावक और छात्र दोनों ही इस स्थिति से चिंतित हैं और उन्हें अपने भविष्य की चिंता सता रही है। राहुल गांधी के बयान ने इस चिंता को और बढ़ा दिया है।

इस बीच, NEET परीक्षा के आयोजन और उसके परिणामों को लेकर भी चर्चा जारी है। कई छात्र संगठनों ने इस मामले में प्रदर्शन करने की योजना बनाई है। यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक कि उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं।

आगे की कार्रवाई में राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे को संसद में उठाने की योजना बना रही है। इसके अलावा, वे अन्य राजनीतिक दलों और संगठनों को भी इस आंदोलन में शामिल करने का प्रयास कर रहे हैं।

इस घटनाक्रम का महत्व इस बात में है कि यह शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में सरकार की नीतियों पर सवाल उठाता है। 22 लाख बच्चों का भविष्य दांव पर है, और यह मुद्दा केवल एक परीक्षा का नहीं, बल्कि व्यापक सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव का प्रतीक है।

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