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सुप्रीम कोर्ट का PCPNDT कानून पर महत्वपूर्ण फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने PCPNDT कानून के तहत अवैध लिंग जांच पर पुलिस को FIR दर्ज करने से रोका है। अदालत ने कहा कि पुलिस को छापे का अधिकार भी नहीं है। यह निर्णय लिंग चयन के खिलाफ कानून को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

20 अगस्त 202620 अगस्त 2026स्रोत: शुक्रवार डेस्क0 बार पढ़ा गया
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भारत के सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में PCPNDT कानून के तहत अवैध लिंग जांच से संबंधित मामलों में पुलिस को FIR दर्ज करने से रोक दिया है। यह फैसला 2023 में सुनाया गया था और इसका मुख्य उद्देश्य लिंग चयन के खिलाफ कानून को सख्त बनाना है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पुलिस को इन मामलों में छापे मारने का अधिकार नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय से यह स्पष्ट होता है कि अवैध लिंग जांच के मामलों में पुलिस की भूमिका सीमित कर दी गई है। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों की जांच के लिए विशेष प्रावधानों की आवश्यकता है। PCPNDT कानून का उद्देश्य लिंग चयन को रोकना और महिलाओं के प्रति भेदभाव को समाप्त करना है।

PCPNDT कानून, जिसे प्री-कनसेप्शन एंड प्री-नैटल डायग्नोस्टिक टेक्निक्स (प्रोहिबिशन ऑफ सेक्स सेलेक्शन) अधिनियम के नाम से भी जाना जाता है, 1994 में लागू किया गया था। यह कानून लिंग चयन के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन इसके कार्यान्वयन में कई चुनौतियाँ रही हैं। अदालत का यह निर्णय इस कानून को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई के दौरान कहा कि अवैध लिंग जांच के मामलों में पुलिस की जांच प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। अदालत ने यह भी कहा कि इस प्रकार के मामलों में उचित जांच के लिए एक विशेष तंत्र की आवश्यकता है। यह निर्णय कानून के कार्यान्वयन में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है।

इस फैसले का आम लोगों पर गहरा प्रभाव पड़ेगा। अवैध लिंग जांच के मामलों में पुलिस की सीमित भूमिका से यह उम्मीद की जा रही है कि इससे लिंग चयन के मामलों में कमी आएगी। यह निर्णय महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।

इस फैसले के बाद, PCPNDT कानून के तहत अवैध लिंग जांच के मामलों में जांच प्रक्रिया को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं। इसके अलावा, इस निर्णय के बाद सरकार को इस कानून के तहत प्रभावी कार्यान्वयन के लिए नई नीतियाँ बनाने की आवश्यकता होगी।

आगे की कार्रवाई में, अदालत ने सुझाव दिया कि इस मामले में एक विशेष समिति का गठन किया जाए, जो अवैध लिंग जांच के मामलों की जांच और निगरानी कर सके। इस समिति का उद्देश्य कानून के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करना होगा।

सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय PCPNDT कानून के तहत अवैध लिंग जांच के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम है। यह निर्णय न केवल महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करता है, बल्कि समाज में लिंग भेदभाव को समाप्त करने की दिशा में भी एक सकारात्मक पहल है। अदालत का यह फैसला इस कानून को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक है।

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