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यूएससीआईआरएफ की RSS पर प्रतिबंध की सिफारिश, भारत ने जताई आपत्ति

यूएससीआईआरएफ ने RSS पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की है। भारत के विदेश मंत्रालय ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है। यह विवाद पिछले 20 वर्षों में कई बार उठ चुका है।

25 अगस्त 202625 अगस्त 2026स्रोत: शुक्रवार डेस्क14 बार पढ़ा गया
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अमेरिकी आयोग USCIRF ने हाल ही में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की है। यह सिफारिश उस समय आई है जब भारत और अमेरिका के बीच संबंधों में जटिलताएँ बढ़ रही हैं। यह घटनाक्रम भारत में राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।

यूएससीआईआरएफ, जिसे अमेरिकी सरकार द्वारा स्थापित किया गया है, धार्मिक स्वतंत्रता के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करता है। आयोग का उद्देश्य विश्वभर में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति की निगरानी करना और उन देशों की पहचान करना है जहाँ धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन हो रहा है। RSS पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश के पीछे आयोग का तर्क है कि संगठन धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकारों का उल्लंघन कर रहा है।

यूएससीआईआरएफ का गठन 1998 में हुआ था और यह पिछले 20 वर्षों में कई बार विवादों में रहा है। आयोग ने पहले भी भारत में धार्मिक स्वतंत्रता के मुद्दों को उठाया है, जिससे भारत सरकार की प्रतिक्रिया अक्सर नकारात्मक रही है। यह विवाद भारत और अमेरिका के बीच संबंधों को प्रभावित कर सकता है, जो पहले से ही कई मुद्दों पर तनाव में हैं।

भारत के विदेश मंत्रालय ने यूएससीआईआरएफ की सिफारिश पर कड़ी आपत्ति जताई है। मंत्रालय ने कहा है कि यह सिफारिश भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने के समान है। भारत ने यह भी स्पष्ट किया है कि RSS एक वैधानिक संगठन है और इसे किसी भी प्रकार के प्रतिबंध का सामना नहीं करना चाहिए।

इस सिफारिश का प्रभाव भारतीय समाज पर भी पड़ सकता है। RSS एक महत्वपूर्ण संगठन है जो भारतीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाता है। यदि इस पर प्रतिबंध लगाया जाता है, तो इससे संगठन के कार्यकर्ताओं और समर्थकों में असंतोष उत्पन्न हो सकता है।

इस विवाद के बीच, भारत और अमेरिका के बीच अन्य मुद्दों पर भी चर्चा जारी है। दोनों देशों के बीच व्यापार, सुरक्षा और सामरिक सहयोग के मुद्दे पर बातचीत चल रही है। हालांकि, यूएससीआईआरएफ की सिफारिश इस बातचीत को प्रभावित कर सकती है।

आगे क्या होगा, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। भारत सरकार ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी विदेशी हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं करेगी। इस मामले में आगे की प्रतिक्रिया और कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है।

इस विवाद का महत्व इसलिए है क्योंकि यह भारत के आंतरिक मामलों में विदेशी हस्तक्षेप का संकेत देता है। साथ ही, यह भारत और अमेरिका के संबंधों पर भी गहरा प्रभाव डाल सकता है। धार्मिक स्वतंत्रता के मुद्दे पर उठे इस विवाद ने दोनों देशों के बीच की जटिलताओं को और बढ़ा दिया है।

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