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राजस्थान: शैक्षिक महासंघ ने TET अनिवार्यता पर पुनर्विचार की मांग

राजस्थान के शैक्षिक महासंघ ने TET की अनिवार्यता पर पुनर्विचार की मांग की है। महासंघ का कहना है कि यह निर्णय शिक्षकों के लिए समस्याएं उत्पन्न कर रहा है। उन्होंने सरकार से इस मुद्दे पर ध्यान देने की अपील की है।

12 जून 20261 घंटे पहलेस्रोत: शुक्रवार डेस्क0 बार पढ़ा गया
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राजस्थान के शैक्षिक महासंघ ने हाल ही में TET (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की अनिवार्यता पर पुनर्विचार की मांग की है। यह मांग महासंघ द्वारा एक बैठक में उठाई गई, जिसमें विभिन्न शिक्षकों और शैक्षिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक का आयोजन जयपुर में किया गया था।

महासंघ का कहना है कि TET की अनिवार्यता शिक्षकों के लिए कई समस्याएं उत्पन्न कर रही हैं। उन्होंने यह भी बताया कि कई योग्य शिक्षक इस परीक्षा में सफल नहीं हो पा रहे हैं, जिससे उनकी नौकरी पर संकट आ रहा है। महासंघ ने सरकार से आग्रह किया है कि इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार किया जाए।

इस संदर्भ में, यह ध्यान देने योग्य है कि TET की अनिवार्यता को पहले से ही कई शिक्षकों द्वारा चुनौती दी जा चुकी है। कई शिक्षकों का मानना है कि यह परीक्षा उनकी योग्यता को सही तरीके से परखने में असफल है। इसके अलावा, यह भी कहा गया है कि इस परीक्षा के कारण योग्य शिक्षकों की कमी हो रही है।

महासंघ ने इस मुद्दे पर सरकार से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली है। हालांकि, उन्होंने उम्मीद जताई है कि सरकार उनकी मांगों पर ध्यान देगी। महासंघ का मानना है कि यदि सरकार इस पर विचार नहीं करती है, तो शिक्षकों के बीच असंतोष बढ़ सकता है।

इस स्थिति का प्रभाव शिक्षकों पर पड़ रहा है, जो अपनी नौकरी को लेकर चिंतित हैं। कई शिक्षकों ने कहा है कि TET की अनिवार्यता के कारण उनकी मेहनत और योग्यता को नजरअंदाज किया जा रहा है। इससे शिक्षकों के मनोबल पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

इससे संबंधित अन्य विकासों में, कुछ शिक्षकों ने इस मुद्दे को लेकर प्रदर्शन करने की योजना बनाई है। वे चाहते हैं कि सरकार इस मामले में जल्द से जल्द कार्रवाई करे। महासंघ ने भी अपने सदस्यों को इस मुद्दे पर जागरूक करने का निर्णय लिया है।

आगे की कार्रवाई के तहत, महासंघ ने सरकार को एक ज्ञापन भेजने की योजना बनाई है। इसमें वे अपनी मांगों को स्पष्ट रूप से रखेंगे और TET की अनिवार्यता पर पुनर्विचार करने की अपील करेंगे। इसके अलावा, महासंघ ने आगामी दिनों में और बैठकें आयोजित करने की भी योजना बनाई है।

इस घटनाक्रम का महत्व इस बात में है कि यह शिक्षकों के भविष्य को प्रभावित कर सकता है। यदि सरकार इस पर ध्यान नहीं देती है, तो यह शिक्षकों के लिए और भी समस्याएं उत्पन्न कर सकता है। महासंघ की यह मांग शिक्षा प्रणाली में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकती है।

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