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2030 तक ईवी की हिस्सेदारी 30 फीसदी होगी: नीति आयोग

नीति आयोग ने ईवी इंडेक्स जारी किया है। इसमें 2030 तक इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी 30 प्रतिशत होने का अनुमान है। बैटरी-चार्जिंग नेटवर्क पर विशेष जोर दिया गया है।

7 अगस्त 20261 घंटे पहलेस्रोत: शुक्रवार डेस्क6 बार पढ़ा गया
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नीति आयोग ने हाल ही में एक ईवी इंडेक्स जारी किया है, जिसमें 2030 तक इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की हिस्सेदारी 30 प्रतिशत होने का अनुमान लगाया गया है। यह रिपोर्ट भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस इंडेक्स में बैटरी-चार्जिंग नेटवर्क के विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या में वृद्धि के लिए बैटरी-चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार आवश्यक है। नीति आयोग ने इस दिशा में कई उपायों का सुझाव दिया है, ताकि ईवी को अपनाने में तेजी लाई जा सके। इसके साथ ही, यह भी बताया गया है कि ईवी इंडस्ट्री में निवेश के अवसर बढ़ रहे हैं।

भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं और नीतियां पहले से लागू हैं। इन नीतियों का उद्देश्य प्रदूषण कम करना और ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ाना है। नीति आयोग की रिपोर्ट इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो भविष्य में ईवी की हिस्सेदारी को बढ़ाने में सहायक होगी।

नीति आयोग ने इस रिपोर्ट में कहा है कि बैटरी-चार्जिंग नेटवर्क का विकास ईवी के लिए एक महत्वपूर्ण पहलू है। इसके बिना, ईवी को अपनाना कठिन हो सकता है। आयोग ने विभिन्न स्तरों पर सहयोग और निवेश की आवश्यकता पर जोर दिया है।

इस रिपोर्ट का सीधा प्रभाव आम लोगों पर पड़ेगा, क्योंकि इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती संख्या से परिवहन लागत में कमी आ सकती है। इसके अलावा, यह पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद होगा, क्योंकि ईवी से प्रदूषण में कमी आएगी।

इससे पहले, भारत सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए कई प्रोत्साहन योजनाएं शुरू की थीं। इन योजनाओं के तहत, उपभोक्ताओं को ईवी खरीदने पर सब्सिडी दी जाती है। इसके अलावा, चार्जिंग स्टेशनों की संख्या बढ़ाने के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं।

आगे की योजनाओं में बैटरी-चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार और ईवी के लिए नई नीतियों का निर्माण शामिल है। नीति आयोग ने सुझाव दिया है कि राज्य सरकारों को भी इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। इससे ईवी की हिस्सेदारी को बढ़ाने में मदद मिलेगी।

इस रिपोर्ट का महत्व इस बात में है कि यह भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों के भविष्य को आकार देने में सहायक होगी। 2030 तक 30 प्रतिशत हिस्सेदारी का लक्ष्य हासिल करने के लिए सभी स्तरों पर प्रयासों की आवश्यकता होगी। यह न केवल आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के लिए भी आवश्यक है।

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