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राष्ट्रपति ने SC में जजों की संख्या बढ़ाने को दी मंजूरी

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाकर 37 करने के लिए अध्यादेश पर हस्ताक्षर किए। इस कदम से मुकदमों के निपटारे में तेजी आने की उम्मीद है। यह निर्णय भारतीय न्यायपालिका के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

17 मई 202617 मई 2026स्रोत: शुक्रवार डेस्क4 बार पढ़ा गया
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भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाकर 37 करने के लिए अध्यादेश पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय न्यायपालिका में लंबित मामलों के निपटारे में तेजी लाने के उद्देश्य से लिया गया है। यह अध्यादेश भारतीय न्यायपालिका के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

इस अध्यादेश के तहत, सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या को वर्तमान 34 से बढ़ाकर 37 किया जाएगा। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब सुप्रीम कोर्ट में कई महत्वपूर्ण मामले लंबित हैं। जजों की संख्या बढ़ाने से न्यायालय में कार्यभार को कम करने और मामलों के त्वरित निपटारे में मदद मिलेगी।

भारतीय न्यायपालिका में जजों की संख्या बढ़ाने का यह कदम पिछले कुछ समय से चर्चा में था। सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही थी, जिससे न्यायिक प्रक्रिया में देरी हो रही थी। इस संदर्भ में, जजों की संख्या बढ़ाने का निर्णय एक आवश्यक सुधार के रूप में देखा जा रहा है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस अध्यादेश पर हस्ताक्षर करते हुए कहा कि यह निर्णय न्यायपालिका की कार्यक्षमता को बढ़ाने में सहायक होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि इससे न्यायालय में मामलों के निपटारे में तेजी आएगी। यह कदम न्यायिक प्रणाली में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

इस निर्णय का सीधा प्रभाव आम लोगों पर पड़ेगा, जो लंबे समय से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। जजों की संख्या बढ़ने से मामलों के त्वरित निपटारे की संभावना बढ़ जाएगी, जिससे लोगों को न्याय मिलने में आसानी होगी। यह कदम न्यायालयों में बढ़ते दबाव को कम करने में भी सहायक होगा।

इस अध्यादेश के अलावा, न्यायपालिका में अन्य सुधारों की भी आवश्यकता महसूस की जा रही है। जजों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ, न्यायिक प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए अन्य उपायों पर भी विचार किया जा रहा है। यह निर्णय न्यायपालिका में सुधार की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।

आगे की प्रक्रिया में, नए जजों की नियुक्ति की जाएगी और सुप्रीम कोर्ट में उनकी भूमिका को स्पष्ट किया जाएगा। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि नए जजों का चयन पारदर्शिता के साथ किया जाए। इसके अलावा, न्यायालयों में लंबित मामलों की संख्या को कम करने के लिए अन्य उपायों पर भी विचार किया जाएगा।

इस निर्णय का महत्व इस बात में है कि यह भारतीय न्यायपालिका की कार्यक्षमता को बढ़ाने का प्रयास है। जजों की संख्या बढ़ाने से न्यायालयों में मामलों के त्वरित निपटारे की संभावना बढ़ेगी। यह कदम न्यायिक प्रणाली में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

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