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सुप्रीम कोर्ट ने यूएपीए मामलों में जमानत नियमों पर नया फैसला दिया

सुप्रीम कोर्ट ने यूएपीए मामलों में जमानत नियमों को स्पष्ट किया है। अदालत ने सैयद इफ्तिखार अंद्राबी को जमानत देते हुए कहा कि धारा 43डी(5) अनिश्चितकालीन कैद का आधार नहीं बन सकती। यह निर्णय अनुच्छेद 21 की सर्वोच्चता को भी रेखांकित करता है।

18 मई 20266 दिन पहलेस्रोत: शुक्रवार डेस्क2 बार पढ़ा गया
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सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय में यूएपीए मामलों में जमानत नियमों को स्पष्ट किया है। यह फैसला 2023 में सुनाया गया था, जिसमें अदालत ने नार्को-आतंक के आरोप में गिरफ्तार सैयद इफ्तिखार अंद्राबी को जमानत दी। अदालत ने कहा कि जमानत नियम, जेल अपवाद के तहत आते हैं, और यह निर्णय भारतीय न्याय प्रणाली में एक महत्वपूर्ण मोड़ है।

अदालत ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि यूएपीए की धारा 43डी(5) अनिश्चितकालीन कैद का आधार नहीं बन सकती। इस धारा के तहत आरोपियों को बिना उचित सुनवाई के लंबे समय तक हिरासत में नहीं रखा जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि अनुच्छेद 21, जो जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार प्रदान करता है, सर्वोपरि है।

यूएपीए, जिसे आतंकवाद से संबंधित मामलों में लागू किया जाता है, के तहत कई आरोपियों को बिना जमानत के लंबे समय तक जेल में रखा जाता है। इस कानून के तहत जमानत प्राप्त करना अक्सर कठिन होता है, जिससे कई बार न्यायिक प्रक्रिया में देरी होती है। इस निर्णय से यह स्पष्ट होता है कि अदालतें अब जमानत के मामलों में अधिक संवेदनशीलता दिखा रही हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई के दौरान कहा कि जमानत नियमों का पालन करना आवश्यक है और इसे अनदेखा नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी बताया कि आरोपी को उचित कानूनी प्रक्रिया का अधिकार है और उसे बिना किसी ठोस आधार के कैद में नहीं रखा जा सकता। यह निर्णय न्यायपालिका की स्वतंत्रता और मानवाधिकारों की रक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

इस निर्णय का सीधा प्रभाव उन लोगों पर पड़ेगा जो यूएपीए के तहत आरोपित हैं। जमानत मिलने से उन्हें जेल से रिहाई का अवसर मिलेगा और वे अपने मामले की सुनवाई के दौरान बाहर रह सकेंगे। इससे उनके जीवन में एक नई उम्मीद जागृत होगी और वे अपने परिवार के साथ समय बिता सकेंगे।

इस फैसले के बाद, कुछ अन्य मामलों में भी जमानत की मांग की जा सकती है, जो यूएपीए के तहत लंबित हैं। यह निर्णय उन सभी आरोपियों के लिए एक मिसाल बनेगा जो इस कानून के तहत जमानत के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इससे न्यायिक प्रक्रिया में भी तेजी आने की संभावना है।

आगे की प्रक्रिया में, यह देखना होगा कि इस निर्णय के बाद अन्य अदालतें किस तरह से जमानत के मामलों में निर्णय लेती हैं। क्या यह निर्णय अन्य मामलों में भी लागू होगा, यह एक महत्वपूर्ण प्रश्न है। न्यायपालिका की इस नई दृष्टिकोण से यह उम्मीद की जा रही है कि न्यायिक प्रक्रिया में सुधार होगा।

इस निर्णय का महत्व इस बात में है कि यह न्यायपालिका की स्वतंत्रता और मानवाधिकारों की रक्षा के प्रति एक सकारात्मक संकेत है। सुप्रीम कोर्ट ने जमानत नियमों को स्पष्ट करके यह सुनिश्चित किया है कि किसी भी आरोपी को बिना उचित सुनवाई के अनिश्चितकालीन कैद में नहीं रखा जा सकता। यह निर्णय भारतीय न्याय प्रणाली में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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