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असम विधानसभा में 17 विधायकों ने संस्कृत में ली शपथ

असम विधानसभा में 17 विधायकों ने संस्कृत में शपथ ली। यह घटना भारतीय ज्ञान परंपरा का प्रतीक मानी जा रही है। संस्कृत भारती ने इसे सांस्कृतिक पुनर्जागरण का संकेत बताया।

22 मई 20262 दिन पहलेस्रोत: शुक्रवार डेस्क12 बार पढ़ा गया
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असम विधानसभा के इतिहास में पहली बार 17 विधायकों ने संस्कृत में शपथ लेकर नया रिकॉर्ड बनाया। यह घटना हाल ही में हुई, जब विधायकों ने अपने पद की शपथ संस्कृत भाषा में ली। इस प्रकार की शपथ लेने का यह पहला अवसर है, जो विधानसभा की कार्यवाही में एक महत्वपूर्ण मोड़ है।

इस घटना के दौरान, संस्कृत में शपथ लेने वाले विधायकों ने भारतीय संस्कृति और परंपरा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। संस्कृत भारती ने इसे भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक बताया है। यह कदम न केवल असम, बल्कि पूरे देश में संस्कृत के प्रति जागरूकता बढ़ाने का एक प्रयास है।

संस्कृत एक प्राचीन भाषा है, जो भारतीय संस्कृति और साहित्य का अभिन्न हिस्सा रही है। इसके महत्व को समझते हुए, कई लोग इसे पुनर्जीवित करने के लिए प्रयासरत हैं। असम विधानसभा में इस प्रकार की शपथ लेना इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

संस्कृत भारती ने इस घटना पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह भारतीय संस्कृति के प्रति एक नई जागरूकता का संकेत है। उन्होंने इसे सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक बताया, जो आने वाले समय में संस्कृत के अध्ययन और उपयोग को बढ़ावा देगा।

इस घटना का प्रभाव स्थानीय लोगों पर भी पड़ा है। संस्कृत में शपथ लेने के बाद, कई लोग इस भाषा के प्रति रुचि दिखा रहे हैं और इसे सीखने की कोशिश कर रहे हैं। यह कदम युवा पीढ़ी के बीच संस्कृत के प्रति जागरूकता बढ़ाने में सहायक हो सकता है।

इस घटना के बाद, संस्कृत के प्रचार-प्रसार के लिए विभिन्न कार्यक्रमों की योजना बनाई जा रही है। शिक्षा संस्थानों में संस्कृत की कक्षाएं शुरू करने की मांग भी उठ रही है। इससे संस्कृत भाषा और संस्कृति को बढ़ावा मिलने की संभावना है।

आगे चलकर, यह देखना होगा कि क्या अन्य राज्यों की विधानसभाएं भी इस प्रकार की पहल करेंगी। यदि ऐसा होता है, तो यह भारतीय संस्कृति के लिए एक सकारात्मक बदलाव हो सकता है। संस्कृत के प्रति बढ़ती रुचि से समाज में एक नई जागरूकता उत्पन्न हो सकती है।

इस घटना का महत्व न केवल असम के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए है। यह भारतीय संस्कृति और परंपरा के प्रति एक नई सोच को दर्शाता है। संस्कृत में शपथ लेना एक महत्वपूर्ण कदम है, जो भारतीय ज्ञान परंपरा को पुनर्जीवित करने का प्रयास है।

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