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कर्नाटक में कांग्रेस के नेतृत्व को लेकर खींचतान

कर्नाटक में कांग्रेस के भीतर नेतृत्व को लेकर खींचतान चल रही है। शिवकुमार को कमान देने या सिद्धारमैया के रसूख को बनाए रखने पर चर्चा हो रही है। इस मुद्दे पर नाश्ते के दौरान निर्णय लिया जाएगा।

27 मई 202654 मिनट पहलेस्रोत: शुक्रवार डेस्क0 बार पढ़ा गया
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कर्नाटक में कांग्रेस पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर खींचतान चल रही है। यह घटनाक्रम बंगलूरू में हो रहा है, जहां पार्टी के वरिष्ठ नेता एक नाश्ते के दौरान इस मुद्दे पर चर्चा कर रहे हैं। इस बैठक में शिवकुमार और सिद्धारमैया के बीच नेतृत्व को लेकर मतभेद स्पष्ट हो रहे हैं।

बैठक में यह तय किया जाएगा कि क्या शिवकुमार को पार्टी की कमान सौंपी जाएगी या फिर सिद्धारमैया का प्रभाव बरकरार रहेगा। इस खींचतान के पीछे पार्टी के भीतर की राजनीति और विभिन्न गुटों के बीच प्रतिस्पर्धा है। दोनों नेताओं के समर्थक अपने-अपने पक्ष को मजबूत करने के लिए सक्रिय हैं।

कर्नाटक में कांग्रेस की स्थिति को देखते हुए यह खींचतान महत्वपूर्ण है। पिछले चुनावों में पार्टी ने अच्छा प्रदर्शन किया था, लेकिन अब नेतृत्व के मुद्दे पर असहमति पार्टी की एकता को प्रभावित कर सकती है। सिद्धारमैया और शिवकुमार दोनों ही कर्नाटक की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं।

इस खींचतान पर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की प्रतिक्रिया का इंतजार है। हालांकि, अभी तक किसी आधिकारिक बयान की पुष्टि नहीं हुई है। पार्टी के भीतर इस मुद्दे पर विचार-विमर्श जारी है और सभी पक्षों की राय ली जा रही है।

इस खींचतान का सीधा प्रभाव पार्टी के कार्यकर्ताओं और समर्थकों पर पड़ सकता है। यदि नेतृत्व परिवर्तन होता है, तो इससे पार्टी की रणनीति और चुनावी तैयारी पर असर पड़ सकता है। कार्यकर्ताओं के बीच असंतोष भी बढ़ सकता है, जो पार्टी की एकता को चुनौती दे सकता है।

इससे पहले, कांग्रेस ने अपने कुछ अन्य नेताओं के साथ भी इसी तरह की बैठकों का आयोजन किया था। इन बैठकों में पार्टी के भविष्य की दिशा और रणनीतियों पर चर्चा की गई थी। हालांकि, इस बार का नाश्ता विशेष रूप से नेतृत्व परिवर्तन के मुद्दे पर केंद्रित है।

आगे की कार्रवाई इस बैठक के परिणामों पर निर्भर करेगी। यदि शिवकुमार को कमान सौंपी जाती है, तो सिद्धारमैया को किनारे किया जा सकता है, जबकि यदि सिद्धारमैया का प्रभाव बना रहता है, तो शिवकुमार को अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए और प्रयास करने होंगे।

कर्नाटक में कांग्रेस के भीतर चल रही यह खींचतान पार्टी की भविष्य की दिशा को निर्धारित कर सकती है। यह न केवल नेताओं के लिए, बल्कि पार्टी के कार्यकर्ताओं और समर्थकों के लिए भी महत्वपूर्ण है। इस मुद्दे का समाधान पार्टी की एकता और चुनावी सफलता के लिए आवश्यक होगा।

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