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भारत ने चीन को दिया जवाब, क्वाड का महत्व स्पष्ट किया

भारत ने चीन को जवाब देते हुए कहा है कि क्वाड किसी देश के खिलाफ नहीं है। जायसवाल ने इसे हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लोगों के लिए सहायक बताया। इस संदर्भ में नॉर्वे के एलएनजी और म्यांमार के राष्ट्रपति की यात्रा का भी स्वागत किया गया।

30 मई 202617 घंटे पहलेस्रोत: शुक्रवार डेस्क6 बार पढ़ा गया
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भारत ने हाल ही में चीन को जवाब देते हुए कहा कि क्वाड (क्वाड्रिलेटरल सिक्योरिटी डायलॉग) किसी देश के खिलाफ नहीं है। यह बयान केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया के सहयोगी मंत्री आर.के. जायसवाल ने दिया। उन्होंने यह टिप्पणी हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए की।

जायसवाल ने स्पष्ट किया कि क्वाड का उद्देश्य हिंद-प्रशांत के लोगों की मदद करना है। उन्होंने कहा कि यह मंच सहयोग और विकास के लिए है, न कि किसी देश के खिलाफ। यह बयान उस समय आया जब चीन ने क्वाड को लेकर अपनी चिंताओं का इजहार किया था।

क्वाड, जिसमें भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं, का गठन 2007 में हुआ था। इसका उद्देश्य क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना है। हाल के वर्षों में, चीन की बढ़ती ताकत के बीच क्वाड की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है।

इस संदर्भ में, जायसवाल ने नॉर्वे के एलएनजी और म्यांमार के राष्ट्रपति की भारत यात्रा का भी स्वागत किया। उन्होंने कहा कि ये दोनों घटनाएं भारत के अंतरराष्ट्रीय संबंधों को मजबूत करने में मदद करेंगी। यह भारत की विदेश नीति में एक महत्वपूर्ण कदम है।

इस बयान का प्रभाव आम लोगों पर भी पड़ सकता है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा बढ़ने से व्यापार और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा। इससे क्षेत्र के देशों के बीच सहयोग भी बढ़ेगा।

क्वाड के संबंध में और भी विकास हो सकते हैं, जिसमें आगामी बैठकों और सहयोग के नए अवसर शामिल हैं। भारत और उसके सहयोगी देशों के बीच बातचीत और सहयोग को बढ़ाने के लिए यह एक महत्वपूर्ण समय है।

आगे की प्रक्रिया में, भारत को अपने सहयोगियों के साथ मिलकर क्वाड के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने की दिशा में काम करना होगा। यह न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी भारत की स्थिति को मजबूत करेगा।

कुल मिलाकर, भारत का यह बयान चीन के प्रति स्पष्टता और दृढ़ता को दर्शाता है। क्वाड का उद्देश्य क्षेत्रीय सहयोग और विकास को बढ़ावा देना है, जो कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लोगों के लिए फायदेमंद होगा। यह घटनाक्रम भारत की विदेश नीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ है।

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