मंगलवार, 2 जून 2026भाषा: हिंदी
शुक्रवार डिजिटल
raajneeti

शशि थरूर ने वंदे मातरम पर उठाए सवाल

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने वंदे मातरम को बोझिल बताया। उन्होंने इसे सरकारी कार्यक्रमों में थोपने का आरोप लगाया। थरूर का कहना है कि इसकी कोई आवश्यकता नहीं है।

2 जून 20261 घंटे पहलेस्रोत: शुक्रवार डेस्क0 बार पढ़ा गया
WXfT

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने हाल ही में वंदे मातरम को लेकर विवादास्पद बयान दिया है। उन्होंने इसे सरकारी कार्यक्रमों में गाने को लेकर सवाल उठाया है। थरूर का यह बयान तब आया जब उन्होंने कहा कि वंदे मातरम को लोगों पर थोपना उचित नहीं है। यह घटना एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान हुई थी।

थरूर ने वंदे मातरम को गैरजरूरी बताते हुए कहा कि इसकी कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने इसे बोझिल करार दिया और कहा कि सरकार इसे लोगों पर थोप रही है। उनका यह बयान राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। थरूर ने स्पष्ट किया कि उन्हें वंदे मातरम से कोई व्यक्तिगत आपत्ति नहीं है, लेकिन इसे अनिवार्य बनाना गलत है।

इस मुद्दे का एक ऐतिहासिक संदर्भ भी है। वंदे मातरम को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान एक महत्वपूर्ण गीत माना गया था। यह गीत बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा लिखा गया था और इसे भारतीय संस्कृति का प्रतीक माना जाता है। हालांकि, आज के समय में इसे लेकर विभिन्न राय और विवाद हैं।

थरूर के बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी तक सामने नहीं आई है। लेकिन यह स्पष्ट है कि उनके विचारों ने राजनीतिक संवाद में एक नई बहस को जन्म दिया है। उनके बयान ने उन लोगों को भी प्रभावित किया है जो वंदे मातरम को अनिवार्य मानते हैं।

इस बयान का आम लोगों पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह देखना दिलचस्प होगा। कुछ लोग थरूर के विचारों का समर्थन कर सकते हैं, जबकि अन्य इसे राष्ट्रवाद के खिलाफ मान सकते हैं। इस प्रकार के बयानों से समाज में विभाजन की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

इस बीच, राजनीतिक दलों के बीच इस मुद्दे पर चर्चा जारी है। कुछ दलों ने थरूर के बयान का समर्थन किया है, जबकि अन्य ने इसकी आलोचना की है। यह मुद्दा आगामी चुनावों में भी एक महत्वपूर्ण विषय बन सकता है।

आगे क्या होगा, यह देखना महत्वपूर्ण है। क्या सरकार इस पर कोई कदम उठाएगी या इसे नजरअंदाज करेगी? थरूर के बयान के बाद, यह स्पष्ट है कि वंदे मातरम को लेकर बहस जारी रहेगी।

इस घटना का सार यह है कि वंदे मातरम जैसे प्रतीकों को लेकर विभिन्न दृष्टिकोण हैं। थरूर का बयान इस बात का संकेत है कि समाज में विचारों की विविधता को समझने की आवश्यकता है। यह मुद्दा न केवल राजनीतिक बल्कि सामाजिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है।

टैग:
शशि थरूरवंदे मातरमकांग्रेसभारत
WXfT

raajneeti की और ख़बरें

और पढ़ें →