प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगस्त 2014 में अपने कार्यकाल की शुरुआत की और अब उन्होंने 12 साल पूरे कर लिए हैं। यह भारत के इतिहास में किसी चुने हुए प्रधानमंत्री का सबसे लंबा कार्यकाल है। उनके कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण योजनाओं और नीतियों की शुरुआत की गई है।
प्रधानमंत्री बनने के चंद महीने बाद, नरेंद्र मोदी ने जन-धन योजना की शुरुआत की। इस योजना के तहत जीरो बैलेंस में बैंक खाता खोला गया, जिससे गरीब और वंचित वर्ग के लोगों को बैंकिंग सेवाओं का लाभ मिल सके। यह योजना आर्थिक समावेशन को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।
इस योजना का उद्देश्य भारत में वित्तीय समावेशन को बढ़ाना और लोगों को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ना था। इसके तहत लाखों लोगों ने बैंक खाते खोले, जिससे उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे मिल सका। यह योजना प्रधानमंत्री मोदी के आर्थिक सुधारों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जन-धन योजना के तहत करोड़ों लोगों ने बैंक खाते खोले हैं। इससे न केवल लोगों की वित्तीय स्थिति में सुधार हुआ है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली है। इस योजना ने डिजिटल लेनदेन को भी बढ़ावा दिया है।
इस योजना का प्रभाव लोगों के जीवन पर सकारात्मक रहा है। कई परिवारों को अब सरकारी सहायता और सब्सिडी सीधे उनके बैंक खातों में मिल रही है। इससे पारदर्शिता बढ़ी है और भ्रष्टाचार में कमी आई है।
प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में अन्य कई योजनाएं भी शुरू की गई हैं, जैसे कि प्रधानमंत्री आवास योजना और स्वच्छ भारत अभियान। इन योजनाओं का उद्देश्य समाज के विभिन्न वर्गों के विकास को सुनिश्चित करना है।
आगे की योजना के तहत, सरकार वित्तीय समावेशन को और बढ़ाने के लिए नई पहलों पर विचार कर रही है। इसके साथ ही, डिजिटल बैंकिंग को और सुलभ बनाने के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 12 साल का कार्यकाल कई उपलब्धियों से भरा रहा है। जन-धन योजना जैसे कार्यक्रमों ने देश में आर्थिक समावेशन को बढ़ावा दिया है। यह कार्यकाल भारत के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
