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खरगे का मोदी पर हमला, नेहरू का जिक्र

मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि इतिहास को तोड़ने-मरोड़ने से सच्चाई नहीं बदलती। इस बयान में नेहरू को सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री बताया गया।

10 जून 202622 घंटे पहलेस्रोत: शुक्रवार डेस्क4 बार पढ़ा गया
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कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला करते हुए कहा कि जवाहरलाल नेहरू भारत के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहे हैं। यह बयान उन्होंने हाल ही में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान दिया। खरगे ने यह भी कहा कि इतिहास को तोड़ने-मरोड़ने से सच्चाई नहीं बदलती।

खरगे ने अपने बयान में नेहरू के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल को भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने यह भी बताया कि नेहरू ने भारतीय राजनीति और समाज पर गहरा प्रभाव डाला। उनके अनुसार, मोदी सरकार ने इतिहास को गलत तरीके से प्रस्तुत करने का प्रयास किया है।

इस बयान के पीछे का संदर्भ यह है कि हाल के दिनों में मोदी सरकार ने नेहरू और कांग्रेस के कार्यकाल की आलोचना की है। कई बार यह आरोप लगाया गया है कि नेहरू के समय में देश की विकास दर कम थी। खरगे का यह बयान ऐसे समय में आया है जब राजनीतिक माहौल काफी गर्म है।

हालांकि, इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। मोदी सरकार ने इस मुद्दे पर अभी तक कोई टिप्पणी नहीं की है। लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इस बयान को महत्वपूर्ण मानते हैं।

खरगे के इस बयान का आम जनता पर प्रभाव पड़ सकता है। कांग्रेस पार्टी के समर्थक इसे एक मजबूत बयान मान सकते हैं, जबकि विपक्ष इसे राजनीतिक खेल के रूप में देख सकता है। इससे राजनीतिक बहस और भी तेज हो सकती है।

इस बीच, कांग्रेस पार्टी ने अपने अन्य नेताओं को भी इस मुद्दे पर बोलने के लिए प्रेरित किया है। पार्टी ने यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि नेहरू के योगदान को सही तरीके से प्रस्तुत किया जाए।

आगे क्या होगा, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। क्या मोदी सरकार इस मुद्दे पर कोई प्रतिक्रिया देगी या यह मामला इसी तरह चलता रहेगा। राजनीतिक विश्लेषक इस पर नजर बनाए हुए हैं।

इस बयान का महत्व इस बात में है कि यह राजनीतिक विमर्श को प्रभावित कर सकता है। खरगे का यह बयान नेहरू के योगदान को फिर से उजागर करता है और कांग्रेस के लिए एक अवसर प्रदान करता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि इतिहास की व्याख्या को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद गहरा है।

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