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भारतीय सेना ने बदला ड्रेस कोड, स्वदेशी तत्व जोड़े

भारतीय सेना ने अपने ड्रेस कोड में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। कोलोनियल पीरियड की कई प्रथाएं समाप्त की गई हैं। 'रॉयल' शब्द को भी हटाया गया है।

14 जून 20261 घंटे पहलेस्रोत: शुक्रवार डेस्क2 बार पढ़ा गया
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भारतीय सेना ने हाल ही में अपने ड्रेस कोड में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। यह बदलाव 2023 में किया गया है और इसका उद्देश्य कोलोनियल पीरियड की प्रथाओं को समाप्त करना है। नए ड्रेस कोड में स्वदेशी तत्वों को शामिल किया गया है, जिससे भारतीय संस्कृति और पहचान को बढ़ावा मिलेगा।

इस नए ड्रेस कोड में कई पुरानी प्रथाओं को समाप्त किया गया है, जो ब्रिटिश राज के समय से चली आ रही थीं। 'रॉयल' शब्द को हटाने का निर्णय भी इसी संदर्भ में लिया गया है। यह बदलाव भारतीय सेना की पहचान को और अधिक स्वदेशी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

भारतीय सेना का यह निर्णय देश में बढ़ती आत्मनिर्भरता और स्वदेशी उत्पादों के प्रति बढ़ते रुझान का हिस्सा है। यह कदम भारतीय संस्कृति को सम्मान देने और औपनिवेशिक मानसिकता से बाहर निकलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इससे सेना की छवि में भी सकारात्मक बदलाव आएगा।

हालांकि, इस बदलाव पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का कोई उल्लेख नहीं किया गया है। लेकिन यह स्पष्ट है कि भारतीय सेना ने अपने ड्रेस कोड में बदलाव के लिए गंभीरता से विचार किया है। यह निर्णय सेना के भीतर और बाहर दोनों ही जगहों पर चर्चा का विषय बन सकता है।

इस बदलाव का आम लोगों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। लोग इस निर्णय को भारतीय सेना की स्वदेशी पहचान के प्रति एक कदम के रूप में देखेंगे। इससे सेना के प्रति लोगों की भावनाएं और भी मजबूत हो सकती हैं।

इससे पहले भी भारतीय सेना ने कई अन्य सुधार किए हैं, जो उसकी कार्यप्रणाली और छवि को बेहतर बनाने के लिए किए गए हैं। यह नया ड्रेस कोड भी उसी श्रृंखला का एक हिस्सा है। इससे यह भी संकेत मिलता है कि सेना अपने मूल्यों और परंपराओं को महत्व देती है।

आगे क्या होगा, यह देखना दिलचस्प होगा। क्या अन्य सशस्त्र बल भी इसी तरह के बदलाव करेंगे? या फिर यह केवल भारतीय सेना तक सीमित रहेगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।

संक्षेप में, भारतीय सेना का नया ड्रेस कोड एक महत्वपूर्ण बदलाव है जो स्वदेशी तत्वों को प्राथमिकता देता है। यह औपनिवेशिक प्रथाओं को समाप्त करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। इस निर्णय का दीर्घकालिक प्रभाव भारतीय सेना की पहचान और छवि पर पड़ेगा।

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