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कांग्रेस ने पीएम मोदी से इस्राइल के प्रति अंधभक्ति छोड़ने की अपील की

कांग्रेस ने प्रधानमंत्री मोदी से इस्राइल के प्रति अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। पार्टी ने कहा है कि सरकार को अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते को ध्यान में रखना चाहिए। इसके साथ ही, पाकिस्तान के संदर्भ में भी उचित नीति अपनाने की सलाह दी गई है।

15 जून 20262 घंटे पहलेस्रोत: शुक्रवार डेस्क2 बार पढ़ा गया
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कांग्रेस पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है कि वे इस्राइल के प्रति अपनी अंधभक्ति को छोड़ें। यह बयान हाल ही में दिए गए एक बयान में आया है, जिसमें पार्टी ने सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस ने यह भी कहा कि भारत को अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार नीति बनानी चाहिए।

कांग्रेस के नेताओं ने कहा कि इस्राइल के प्रति अंधभक्ति भारत की विदेश नीति को कमजोर कर सकती है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे शांति समझौते को ध्यान में रखते हुए भारत को एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। पार्टी ने यह भी कहा कि पाकिस्तान के संदर्भ में भी सरकार को स्पष्ट नीति बनानी चाहिए।

कांग्रेस का यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत की विदेश नीति पर विभिन्न राजनीतिक दलों और विशेषज्ञों द्वारा चर्चा हो रही है। पार्टी ने कहा कि वर्तमान स्थिति में भारत को अपने पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को मजबूत करने की आवश्यकता है। इसके लिए एक संतुलित और विचारशील दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है।

कांग्रेस ने इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या बयान नहीं दिया है, लेकिन पार्टी के नेताओं ने मीडिया से बातचीत में अपनी चिंताओं को स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि सरकार को अपनी विदेश नीति में बदलाव लाने की आवश्यकता है।

इस बयान का प्रभाव आम लोगों पर भी पड़ सकता है, जो विदेश नीति के मुद्दों पर सरकार की दिशा को लेकर चिंतित हैं। कांग्रेस का यह कदम उन लोगों के लिए एक संकेत हो सकता है जो भारत की विदेश नीति में अधिक संतुलन की मांग कर रहे हैं।

इससे पहले भी कांग्रेस ने कई बार सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाए हैं। पार्टी ने कहा है कि सरकार को अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए और किसी एक देश के प्रति अंधभक्ति से बचना चाहिए।

आगे क्या होगा, यह देखना दिलचस्प होगा। क्या सरकार इस सलाह को गंभीरता से लेगी या अपने पूर्व के दृष्टिकोण पर कायम रहेगी, यह भविष्य में स्पष्ट होगा।

कांग्रेस का यह बयान भारत की विदेश नीति के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। यह दर्शाता है कि राजनीतिक दलों के बीच इस मुद्दे पर विचार-विमर्श जारी है और सभी पक्षों को अपने दृष्टिकोण को स्पष्ट करने की आवश्यकता है।

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