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RSS के पंजीकरण की मांग पर भागवत का बयान

आरएसएस के पंजीकरण की मांग को राजनीति से प्रेरित बताया गया है। मोहन भागवत ने प्रियांक खरगे के आरोपों का जवाब दिया। यह मामला कर्नाटक में राजनीतिक चर्चा का विषय बना हुआ है।

15 जून 20261 घंटे पहलेस्रोत: शुक्रवार डेस्क0 बार पढ़ा गया
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कर्नाटक में आरएसएस के पंजीकरण की मांग को लेकर प्रियांक खरगे द्वारा लगाए गए आरोपों के जवाब में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि यह मांग राजनीति से प्रेरित है। यह बयान हाल ही में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान दिया गया। भागवत ने इस मुद्दे पर संघ की स्थिति स्पष्ट की।

भागवत ने कहा कि आरएसएस का पंजीकरण एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन इसे राजनीतिक रंग देने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल इस मुद्दे को भुनाने की कोशिश कर रहे हैं। इस संदर्भ में उन्होंने यह भी कहा कि संघ का उद्देश्य समाज सेवा है, न कि राजनीति करना।

इस विवाद का संदर्भ कर्नाटक में हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों से जुड़ा हुआ है। प्रियांक खरगे ने आरएसएस पर आरोप लगाया था कि वह राज्य में अपनी गतिविधियों को बढ़ाने के लिए पंजीकरण की मांग कर रहा है। यह आरोप कर्नाटक में राजनीतिक माहौल को गरमाने का काम कर रहा है।

इस मामले पर संघ की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन भागवत के बयान को संघ की ओर से एक स्पष्ट प्रतिक्रिया माना जा रहा है। उन्होंने इस मुद्दे को राजनीति से अलग रखने की कोशिश की है। संघ का कहना है कि उनकी गतिविधियाँ समाज के लिए हैं।

इस विवाद का प्रभाव आम जनता पर भी पड़ सकता है। राजनीतिक दलों के बीच इस मुद्दे पर तकरार से जनता में असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इससे कर्नाटक की राजनीति में और भी जटिलता आ सकती है।

इस बीच, कर्नाटक में राजनीतिक गतिविधियाँ तेज हो गई हैं। विभिन्न दल इस मुद्दे पर अपने-अपने दृष्टिकोण प्रस्तुत कर रहे हैं। इससे राजनीतिक संवाद और भी बढ़ सकता है।

आगे क्या होगा, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। राजनीतिक दल इस मुद्दे को अपने चुनावी अभियान में शामिल कर सकते हैं। इससे कर्नाटक में आगामी चुनावों पर भी असर पड़ सकता है।

इस पूरे मामले का महत्व इस बात में है कि यह कर्नाटक में आरएसएस की भूमिका और राजनीतिक दलों के बीच की प्रतिस्पर्धा को उजागर करता है। यह मुद्दा न केवल कर्नाटक, बल्कि पूरे देश में राजनीतिक चर्चाओं का हिस्सा बन सकता है।

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