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ममता बनर्जी ने कलकत्ता हाईकोर्ट में दायर की याचिका

ममता बनर्जी ने भवानीपुर सीट पर हार के बाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। उन्होंने मतगणना में गड़बड़ी का आरोप लगाया है। याचिका में चुनावी रिकॉर्ड और ईवीएम को सुरक्षित रखने की मांग की गई है।

16 जून 20261 घंटे पहलेस्रोत: शुक्रवार डेस्क4 बार पढ़ा गया
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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भवानीपुर विधानसभा सीट पर शुभेंदु अधिकारी से 15,105 वोटों से हारने के बाद कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। यह घटना हाल ही में हुई विधानसभा चुनावों के परिणामों के बाद की है। ममता बनर्जी ने इस हार को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है और न्याय की मांग की है।

याचिका में ममता बनर्जी ने मतगणना में गड़बड़ी का आरोप लगाया है। उन्होंने चुनावी रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) को सुरक्षित रखने की मांग की है। उनका कहना है कि इस मामले में उचित जांच की आवश्यकता है ताकि चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।

पश्चिम बंगाल में हाल के विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला था। ममता बनर्जी की पार्टी ने चुनावी प्रचार में जोरदार प्रयास किए थे, लेकिन उन्हें कुछ सीटों पर हार का सामना करना पड़ा। भवानीपुर सीट पर हार ने राजनीतिक माहौल में हलचल पैदा कर दी है।

ममता बनर्जी की याचिका पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, उनके समर्थकों ने इस कदम को सही ठहराते हुए कहा है कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता आवश्यक है। इससे पहले भी चुनावी गड़बड़ी के आरोप लगते रहे हैं, जो लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है।

इस हार के बाद ममता बनर्जी के समर्थकों में निराशा का माहौल है। कई लोगों ने इस हार को तृणमूल कांग्रेस की रणनीति में कमी के रूप में देखा है। इससे पार्टी के भीतर भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि भविष्य में कैसे चुनावी रणनीति को बेहतर बनाया जा सकता है।

भवानीपुर सीट पर हार के बाद ममता बनर्जी ने अपनी पार्टी के भीतर समीक्षा बैठक करने का निर्णय लिया है। इसके अलावा, पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ आगामी चुनावों की रणनीति पर चर्चा की जाएगी। इससे यह स्पष्ट होगा कि TMC अपने कार्यकर्ताओं को कैसे प्रेरित करेगी।

आगे की प्रक्रिया में कलकत्ता हाईकोर्ट द्वारा याचिका पर सुनवाई की जाएगी। यदि कोर्ट ने ममता बनर्जी की मांगों को स्वीकार किया, तो चुनावी रिकॉर्ड और ईवीएम की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी। इससे चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता को बढ़ावा मिलेगा।

इस घटना का महत्व इसलिए है क्योंकि यह पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया मोड़ ला सकती है। ममता बनर्जी की याचिका से यह स्पष्ट होता है कि वे चुनावी प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को बर्दाश्त नहीं करेंगी। इससे भविष्य में चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी असर पड़ सकता है।

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