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शिक्षा खर्च बढ़ाने की आवश्यकता पर संसदीय समिति की रिपोर्ट

संसदीय समिति ने शिक्षा बजट आवंटन को अपर्याप्त बताया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति का 6% जीडीपी लक्ष्य अभी भी अधूरा है। समिति ने शिक्षा खर्च बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

17 जून 20261 घंटे पहलेस्रोत: शुक्रवार डेस्क0 बार पढ़ा गया
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हाल ही में एक संसदीय समिति ने शिक्षा खर्च बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया है। समिति ने कहा कि वर्तमान बजट आवंटन पर्याप्त नहीं है। यह रिपोर्ट उस समय आई है जब देश में शिक्षा के क्षेत्र में सुधार की चर्चा हो रही है।

समिति ने यह भी बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) का 6% जीडीपी लक्ष्य अभी तक अधूरा है। यह लक्ष्य शिक्षा के क्षेत्र में निवेश को बढ़ाने के लिए निर्धारित किया गया था। समिति के अनुसार, यदि इस लक्ष्य को हासिल नहीं किया गया, तो शिक्षा प्रणाली में सुधार की उम्मीदें धूमिल हो जाएंगी।

भारत में शिक्षा का बजट हमेशा से एक महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में शिक्षा के क्षेत्र में कई सुधारों की कोशिश की गई है, लेकिन बजट आवंटन में कमी ने इन प्रयासों को प्रभावित किया है। शिक्षा के क्षेत्र में निवेश की कमी से छात्रों की गुणवत्ता और उनके भविष्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

समिति ने इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन इसके सदस्यों ने चिंता व्यक्त की है कि शिक्षा के लिए आवंटन में वृद्धि आवश्यक है। समिति का यह भी कहना है कि यदि सरकार इस दिशा में कदम नहीं उठाती है, तो शिक्षा के क्षेत्र में सुधार की संभावना कम हो जाएगी।

इस रिपोर्ट का प्रभाव आम लोगों पर भी पड़ सकता है। यदि शिक्षा के लिए बजट में वृद्धि नहीं होती है, तो छात्रों को बेहतर सुविधाएं और संसाधन नहीं मिल पाएंगे। इससे शिक्षा का स्तर प्रभावित होगा और छात्रों के भविष्य पर नकारात्मक असर पड़ेगा।

इस बीच, शिक्षा मंत्रालय ने इस मुद्दे पर कोई विशेष विकास नहीं किया है। हालांकि, यह उम्मीद की जा रही है कि मंत्रालय इस रिपोर्ट के बाद बजट आवंटन पर विचार करेगा। शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के लिए विभिन्न संगठनों और विशेषज्ञों द्वारा भी आवाज उठाई जा रही है।

आगे क्या होगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार इस रिपोर्ट को कितनी गंभीरता से लेती है। यदि सरकार बजट आवंटन में वृद्धि करती है, तो इससे शिक्षा के क्षेत्र में सुधार की संभावनाएं बढ़ेंगी। इसके विपरीत, यदि कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाते हैं, तो स्थिति जस की तस बनी रह सकती है।

संक्षेप में, संसदीय समिति की रिपोर्ट शिक्षा के क्षेत्र में बजट आवंटन की आवश्यकता को उजागर करती है। NEP का 6% जीडीपी लक्ष्य अभी भी अधूरा है, जो कि शिक्षा के सुधार के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है। यदि इस दिशा में कदम नहीं उठाए गए, तो शिक्षा प्रणाली में सुधार की संभावनाएं कम हो जाएंगी।

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