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टेलीग्राम पर अस्थायी बैन बरकरार, हाईकोर्ट का फैसला

दिल्ली हाईकोर्ट ने टेलीग्राम पर अस्थायी बैन को बरकरार रखा है। यह बैन नीट (UG) 2026 री-एग्जाम की सुरक्षा के लिए लगाया गया था। कंपनी ने इस बैन के खिलाफ याचिका दायर की थी।

19 जून 20264 घंटे पहलेस्रोत: शुक्रवार डेस्क0 बार पढ़ा गया
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दिल्ली हाईकोर्ट ने टेलीग्राम पर लगे अस्थायी बैन को हटाने से इनकार कर दिया है। यह बैन नीट (UG) 2026 री-एग्जाम की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लगाया गया था। अदालत ने यह निर्णय हाल ही में सुनाया है, जिससे टेलीग्राम उपयोगकर्ताओं में निराशा का माहौल है।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरकार के पास ऐसे प्रतिबंध लगाने का अधिकार है। यह बैन तब लागू किया गया जब यह महसूस किया गया कि टेलीग्राम का उपयोग परीक्षा में धोखाधड़ी के लिए किया जा सकता है। अदालत ने इस मामले में सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद यह निर्णय लिया।

इस मामले का संदर्भ यह है कि नीट (UG) परीक्षा देशभर में एक महत्वपूर्ण परीक्षा मानी जाती है। छात्रों के लिए यह परीक्षा मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए अनिवार्य है। ऐसे में परीक्षा की सुरक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक है, जिससे टेलीग्राम पर बैन लगाया गया।

अदालत ने कहा कि सरकार को यह अधिकार है कि वह परीक्षा की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए। हालांकि, टेलीग्राम कंपनी ने इस बैन के खिलाफ याचिका दायर की थी, लेकिन अदालत ने इसे खारिज कर दिया। यह निर्णय सरकार के अधिकारों को स्पष्ट करता है।

इस बैन का प्रभाव छात्रों पर पड़ सकता है, जो टेलीग्राम का उपयोग अध्ययन और जानकारी साझा करने के लिए करते थे। अब उन्हें अन्य माध्यमों का सहारा लेना पड़ेगा। इससे छात्रों के बीच चिंता और असुविधा बढ़ सकती है।

इस बीच, टेलीग्राम कंपनी ने इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई करने का संकेत दिया है। कंपनी ने कहा है कि वे इस बैन के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में अपील करने पर विचार कर रहे हैं। इससे यह मामला और भी जटिल हो सकता है।

आगे क्या होगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि टेलीग्राम कंपनी उच्चतम न्यायालय में क्या कदम उठाती है। यदि मामला उच्चतम न्यायालय तक पहुंचता है, तो वहां से भी कोई नया निर्णय आ सकता है। इस स्थिति में छात्रों और टेलीग्राम उपयोगकर्ताओं को ध्यान से देखना होगा।

इस निर्णय का महत्व इस बात में है कि यह सरकार के परीक्षा सुरक्षा उपायों को मजबूत करता है। साथ ही, यह दिखाता है कि अदालतें ऐसे मामलों में सरकार के अधिकारों का समर्थन कर सकती हैं। छात्रों के लिए यह एक महत्वपूर्ण समय है, क्योंकि उन्हें अपनी अध्ययन विधियों को फिर से व्यवस्थित करना पड़ सकता है।

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