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कलकत्ता हाईकोर्ट ने ममता और अभिषेक बनर्जी को भेजा अवमानना नोटिस

कलकत्ता हाईकोर्ट ने ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी को शहीद दिवस रैली के कारण अवमानना का नोटिस भेजा है। यह नोटिस सड़क जाम की घटना से संबंधित है। मामले की सुनवाई आगे की जाएगी।

19 जून 20261 घंटे पहलेस्रोत: शुक्रवार डेस्क6 बार पढ़ा गया
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कलकत्ता हाईकोर्ट ने हाल ही में ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी को शहीद दिवस रैली के दौरान सड़क जाम करने के मामले में अवमानना का नोटिस भेजा है। यह घटना पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में हुई थी। रैली के दौरान सड़कों पर भारी भीड़ इकट्ठा हो गई, जिससे यातायात प्रभावित हुआ।

इस रैली का आयोजन तृणमूल कांग्रेस द्वारा किया गया था, जिसमें पार्टी के कई नेता और समर्थक शामिल हुए थे। रैली के दौरान सड़कें जाम हो गईं, जिससे आम जनता को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। इस घटना के बाद हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए यह नोटिस जारी किया।

पश्चिम बंगाल में शहीद दिवस रैली का आयोजन हर साल किया जाता है, जो पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम है। यह रैली उन लोगों की याद में आयोजित की जाती है, जिन्होंने राजनीतिक कारणों से अपनी जान गंवाई। इस वर्ष की रैली में भीड़ की संख्या अधिक होने के कारण सड़कें जाम हो गईं।

कलकत्ता हाईकोर्ट ने इस मामले में ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी को नोटिस भेजते हुए कहा कि वे इस घटना के लिए जिम्मेदार हैं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस प्रकार की घटनाएं कानून के प्रति अवमानना के समान हैं। इस नोटिस के माध्यम से कोर्ट ने राजनीतिक नेताओं की जिम्मेदारी को रेखांकित किया है।

इस घटना का आम जनता पर गहरा प्रभाव पड़ा है। सड़क जाम होने के कारण कई लोगों को अपने गंतव्य तक पहुँचने में कठिनाई का सामना करना पड़ा। इससे यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हुई, जिससे लोगों में असंतोष बढ़ा।

इस बीच, तृणमूल कांग्रेस पार्टी ने इस नोटिस के खिलाफ कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि, पार्टी के नेता इस मामले को लेकर चिंतित हैं और इसे राजनीतिक प्रतिशोध के रूप में देख सकते हैं।

आगे की कार्रवाई के तहत, कलकत्ता हाईकोर्ट इस मामले की सुनवाई करेगा और यह देखेगा कि क्या ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी ने कानून का उल्लंघन किया है। यह सुनवाई आगामी दिनों में होने की संभावना है।

इस घटना ने एक बार फिर से राजनीतिक नेताओं की जिम्मेदारी और सार्वजनिक व्यवस्था के महत्व को उजागर किया है। हाईकोर्ट का यह कदम यह दर्शाता है कि कानून सभी के लिए समान है, चाहे वे कितने भी बड़े नेता क्यों न हों। यह मामला आगे चलकर राजनीतिक चर्चाओं का विषय बन सकता है।

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