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केरल पर पांच लाख करोड़ का कर्ज, शशि थरूर ने उठाए सवाल

केरल सरकार पर पांच लाख करोड़ रुपये का कर्ज है। शशि थरूर ने इसे लेकर लेफ्ट सरकार के मॉडल की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि वेतन और बोनस उधारी से दिए जा रहे हैं।

20 जून 202652 मिनट पहलेस्रोत: शुक्रवार डेस्क4 बार पढ़ा गया
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केरल राज्य पर वर्तमान में लगभग पांच लाख करोड़ रुपये का कर्ज है। यह जानकारी कांग्रेस नेता शशि थरूर ने हाल ही में साझा की। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार अपने कर्मचारियों को वेतन और बोनस उधारी के माध्यम से दे रही है। यह स्थिति राज्य की वित्तीय स्वास्थ्य के लिए चिंताजनक है।

शशि थरूर ने केरल सरकार के 'वाम मॉडल' की आलोचना करते हुए कहा कि यह प्रणाली आर्थिक स्थिरता को खतरे में डाल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने कर्ज के बोझ को बढ़ाने के लिए कोई ठोस योजना नहीं बनाई है। इसके परिणामस्वरूप, राज्य की वित्तीय स्थिति और भी बिगड़ती जा रही है।

केरल की वित्तीय स्थिति का यह संकट लंबे समय से चल रहा है। राज्य सरकार ने विभिन्न योजनाओं और परियोजनाओं के लिए भारी मात्रा में उधारी ली है। इसके चलते राज्य का कर्ज लगातार बढ़ता जा रहा है, जो कि विकास के लिए एक बड़ा बाधा बन सकता है।

इस मुद्दे पर अभी तक राज्य सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, यह स्पष्ट है कि शशि थरूर के बयान ने इस विषय पर एक नई बहस को जन्म दिया है। राजनीतिक विश्लेषक इस स्थिति को लेकर विभिन्न दृष्टिकोण प्रस्तुत कर रहे हैं।

इस कर्ज के कारण आम लोगों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। राज्य सरकार की वित्तीय स्थिति कमजोर होने से विकासात्मक योजनाएं प्रभावित हो रही हैं। इससे रोजगार के अवसर भी सीमित हो रहे हैं, जो कि आम जनता के लिए चिंता का विषय है।

इस बीच, केरल सरकार ने कुछ नई योजनाओं की घोषणा की है, लेकिन इन योजनाओं के कार्यान्वयन पर सवाल उठ रहे हैं। विपक्षी दलों ने सरकार की नीतियों की आलोचना की है और इसे चुनावी रणनीति के तहत देखा जा रहा है।

आगे क्या होगा, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। यदि सरकार अपने वित्तीय प्रबंधन में सुधार नहीं करती है, तो यह स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है।

कुल मिलाकर, केरल का यह कर्ज संकट राज्य की आर्थिक स्थिरता के लिए एक बड़ा खतरा है। शशि थरूर के बयान ने इस मुद्दे को और अधिक उजागर किया है, जिससे राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। यह स्थिति न केवल सरकार के लिए, बल्कि आम जनता के लिए भी चिंता का विषय बन गई है।

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