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डोभाल और रूसी सुरक्षा सचिव की मुलाकात, द्विपक्षीय सहयोग पर चर्चा

एनएसए डोभाल ने रूसी सुरक्षा परिषद के सचिव से मुलाकात की। इस दौरान द्विपक्षीय सहयोग के मुद्दों पर चर्चा की गई। यह बैठक BRICS एनएसए मीट के दौरान हुई।

23 जून 20262 घंटे पहलेस्रोत: शुक्रवार डेस्क0 बार पढ़ा गया
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हाल ही में, भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल ने रूसी सुरक्षा परिषद के सचिव निकोलाई पेत्रुशेव से मुलाकात की। यह बैठक BRICS एनएसए मीट के दौरान आयोजित की गई। इस अवसर पर दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की।

बैठक में, डोभाल और पेत्रुशेव ने सुरक्षा से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श किया। दोनों देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने के लिए कई पहलुओं पर चर्चा की गई। इस बातचीत का मुख्य उद्देश्य भारत और रूस के बीच रणनीतिक संबंधों को और गहरा करना था।

भारत और रूस के बीच ऐतिहासिक संबंध हैं, जो कई दशकों से चले आ रहे हैं। दोनों देशों ने विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग किया है, जिसमें रक्षा, ऊर्जा और आतंकवाद विरोधी गतिविधियाँ शामिल हैं। वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में, यह सहयोग और भी महत्वपूर्ण हो गया है।

इस मुलाकात के दौरान, कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। हालांकि, यह स्पष्ट है कि दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। यह बैठक दोनों देशों के बीच संवाद को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण अवसर था।

इस मुलाकात का स्थानीय लोगों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। भारत और रूस के बीच बढ़ता सहयोग सुरक्षा और आर्थिक विकास के लिए फायदेमंद हो सकता है। इससे दोनों देशों के नागरिकों के लिए नए अवसर उत्पन्न हो सकते हैं।

इस बैठक के अलावा, BRICS देशों के अन्य सुरक्षा सलाहकारों के साथ भी चर्चा की गई। यह मीटिंग वैश्विक सुरक्षा मुद्दों पर एक मंच प्रदान करती है। इससे BRICS देशों के बीच सहयोग को और बढ़ावा मिलने की संभावना है।

आगे की कार्रवाई के रूप में, दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ाने के लिए और बैठकें आयोजित की जा सकती हैं। इसके अलावा, विभिन्न क्षेत्रों में संयुक्त परियोजनाओं पर काम करने की संभावना भी है। यह सहयोग भविष्य में और भी मजबूत हो सकता है।

इस बैठक का महत्व इस बात में है कि यह भारत और रूस के बीच संबंधों को और गहरा करने का एक प्रयास है। वैश्विक सुरक्षा के संदर्भ में, यह सहयोग दोनों देशों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। इस प्रकार की मुलाकातें भविष्य में भी जारी रह सकती हैं।

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