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कोलकाता में गोदाम ढहने से मजदूरों में हड़कंप

कोलकाता में एक गोदाम ढहने की घटना में कई मजदूर मलबे में दब गए। एक मजदूर ने मलबे में से मदद की गुहार लगाते हुए पैर काटने की बात कही। यह घटना स्थानीय लोगों और प्रशासन के लिए चिंता का विषय बन गई है।

25 जून 20261 घंटे पहलेस्रोत: शुक्रवार डेस्क0 बार पढ़ा गया
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कोलकाता में एक गोदाम ढहने की घटना 16 अक्टूबर 2023 को हुई। यह घटना शहर के एक व्यस्त इलाके में घटित हुई, जहां कई मजदूर काम कर रहे थे। गोदाम के अचानक ढहने से कई मजदूर मलबे में दब गए, जिससे हड़कंप मच गया। स्थानीय लोग और बचाव दल तुरंत मौके पर पहुंचे।

घटना के बाद, मलबे में दबे एक मजदूर ने मदद की गुहार लगाते हुए कहा कि, "पैर काट दो, पर मेरी जान बचा लो।" यह सुनकर बचाव दल ने तेजी से काम करना शुरू किया। मलबे में दबे मजदूरों को निकालने के लिए भारी मशीनों का उपयोग किया गया। स्थानीय प्रशासन ने भी बचाव कार्य में मदद की।

यह घटना कोलकाता में निर्माण सुरक्षा के मुद्दों को उजागर करती है। पिछले कुछ वर्षों में, शहर में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया। गोदाम के ढहने की घटना ने लोगों में चिंता पैदा कर दी है कि क्या इस तरह के हादसे फिर से हो सकते हैं।

स्थानीय प्रशासन ने घटना की जांच के आदेश दिए हैं। अधिकारियों ने कहा है कि जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, सुरक्षा मानकों के पालन के लिए सख्त उपाय करने की बात भी कही गई है।

इस घटना का सीधा प्रभाव उन मजदूरों पर पड़ा है जो मलबे में दब गए थे। उनके परिवारों में चिंता और भय का माहौल है। स्थानीय समुदाय ने भी इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त की है और पीड़ितों के लिए सहायता की मांग की है।

घटना के बाद, स्थानीय लोगों ने निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों के पालन की आवश्यकता पर जोर दिया है। कुछ संगठनों ने मजदूरों के अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज उठाई है। इस घटना ने निर्माण कार्य में सुरक्षा की अनिवार्यता को फिर से रेखांकित किया है।

आगे की कार्रवाई में, प्रशासन ने कहा है कि वे मलबे में दबे मजदूरों को जल्द से जल्द निकालने का प्रयास करेंगे। इसके साथ ही, भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने का आश्वासन दिया गया है।

इस घटना ने कोलकाता में निर्माण सुरक्षा के मुद्दों को एक बार फिर से उजागर किया है। यह घटना न केवल पीड़ितों के लिए बल्कि पूरे समुदाय के लिए एक चेतावनी है कि सुरक्षा मानकों का पालन कितना आवश्यक है। प्रशासन और स्थानीय लोगों को मिलकर इस दिशा में ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।

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