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किताबों में आपातकाल पर राजनीति, कांग्रेस नाराज

कांग्रेस ने NCERT की पाठ्यपुस्तकों में आपातकाल को लेकर आपत्ति जताई है। भाजपा के दृष्टिकोण से यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है। इस विवाद ने इतिहास की शिक्षा में राजनीतिक हस्तक्षेप को उजागर किया है।

29 जून 20261 घंटे पहलेस्रोत: शुक्रवार डेस्क0 बार पढ़ा गया
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कांग्रेस पार्टी ने हाल ही में NCERT की पाठ्यपुस्तकों में आपातकाल के संदर्भ में बदलावों पर नाराजगी व्यक्त की है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब भाजपा ने आपातकाल के दौरान की घटनाओं को अपने दृष्टिकोण से पेश करने का प्रयास किया। यह मामला भारतीय राजनीति में एक नई बहस का विषय बन गया है।

कांग्रेस का कहना है कि NCERT की पाठ्यपुस्तकों में आपातकाल को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि भाजपा इतिहास को विकृत कर रही है और अपने राजनीतिक लाभ के लिए तथ्यों को तोड़-मरोड़ रही है। इस विवाद ने शिक्षा के क्षेत्र में राजनीतिक हस्तक्षेप की गंभीरता को उजागर किया है।

आपातकाल, जो 1975 से 1977 तक चला, भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटना है। यह समय भारतीय लोकतंत्र के लिए चुनौतीपूर्ण रहा है, और इसके दौरान कई राजनीतिक नेताओं को जेल में डाल दिया गया था। इस विषय पर विभिन्न राजनीतिक दलों के दृष्टिकोण में काफी भिन्नता है, जो इस विवाद को और भी जटिल बनाता है।

कांग्रेस ने NCERT के इस कदम की आलोचना करते हुए कहा है कि यह शिक्षा के क्षेत्र में राजनीतिक दखलंदाजी का एक उदाहरण है। पार्टी ने मांग की है कि पाठ्यपुस्तकों में ऐतिहासिक तथ्यों को सही तरीके से प्रस्तुत किया जाए। इस पर भाजपा ने अपनी प्रतिक्रिया दी है, जिसमें उन्होंने अपने दृष्टिकोण को सही ठहराने का प्रयास किया है।

इस विवाद का आम लोगों पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है। छात्रों को इतिहास की गलत जानकारी मिलने से उनके विचारों और दृष्टिकोण पर असर पड़ेगा। इससे समाज में राजनीतिक ध्रुवीकरण भी बढ़ सकता है, जो कि लोकतंत्र के लिए हानिकारक है।

इस बीच, कुछ अन्य विकास भी हो रहे हैं। शिक्षा मंत्रालय ने इस मुद्दे पर विचार करने के लिए एक समिति का गठन किया है। समिति का उद्देश्य पाठ्यपुस्तकों में आवश्यक सुधारों की सिफारिश करना है, ताकि ऐतिहासिक तथ्यों को सही तरीके से प्रस्तुत किया जा सके।

आगे क्या होगा, यह देखना महत्वपूर्ण है। यदि समिति अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करती है, तो इससे पाठ्यपुस्तकों में बदलाव हो सकता है। लेकिन राजनीतिक दलों के बीच इस मुद्दे पर मतभेद बने रहने की संभावना है।

कुल मिलाकर, यह विवाद भारतीय शिक्षा प्रणाली में राजनीतिक हस्तक्षेप के मुद्दे को उजागर करता है। कांग्रेस और भाजपा के बीच यह टकराव न केवल इतिहास की शिक्षा पर प्रभाव डाल सकता है, बल्कि यह भारतीय लोकतंत्र की जड़ों को भी प्रभावित कर सकता है।

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