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मेकदातु परियोजना पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार की याचिका खारिज की। मेकेदातु परियोजना को लेकर सर्वदलीय बैठक की मांग उठी है। यह परियोजना कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच जल विवाद से जुड़ी है।

5 जुलाई 20261 घंटे पहलेस्रोत: शुक्रवार डेस्क4 बार पढ़ा गया
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मेकदातु परियोजना को लेकर हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार की याचिका को खारिज कर दिया है। यह मामला कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच जल विवाद से संबंधित है। इस निर्णय के बाद तमिलनाडु में सर्वदलीय बैठक की मांग उठाई गई है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद तमिलनाडु सरकार ने मेकेदातु परियोजना के खिलाफ अपनी चिंताओं को व्यक्त किया है। यह परियोजना कर्नाटक द्वारा प्रस्तावित की गई है, जिसमें कावेरी नदी के जल का संरक्षण और उपयोग करने की योजना है। तमिलनाडु का मानना है कि यह परियोजना उनके जल अधिकारों का उल्लंघन करती है।

इस विवाद का इतिहास काफी पुराना है, जिसमें कावेरी नदी के जल बंटवारे को लेकर दोनों राज्यों के बीच कई बार टकराव हो चुका है। मेकेदातु परियोजना का प्रस्ताव कर्नाटक सरकार द्वारा 2018 में पेश किया गया था, जिसके बाद से ही यह मुद्दा राजनीतिक और कानूनी बहस का विषय बना हुआ है।

तमिलनाडु सरकार ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अपनी स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा है कि वे जल अधिकारों की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। इस संदर्भ में सर्वदलीय बैठक की मांग की गई है ताकि सभी राजनीतिक दल एकजुट होकर इस मुद्दे पर चर्चा कर सकें।

इस फैसले का प्रभाव तमिलनाडु के लोगों पर पड़ सकता है, विशेषकर उन किसानों पर जो कावेरी नदी के जल पर निर्भर हैं। यदि मेकेदातु परियोजना को आगे बढ़ाया जाता है, तो इससे जल संकट और बढ़ सकता है। इस मुद्दे ने राज्य में जल प्रबंधन और कृषि पर भी चिंता बढ़ा दी है।

इस बीच, कर्नाटक सरकार ने मेकेदातु परियोजना को लेकर अपने कार्यों को जारी रखा है। उन्होंने इस परियोजना के लिए आवश्यक अनुमतियों को प्राप्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह स्थिति दोनों राज्यों के बीच तनाव को और बढ़ा सकती है।

आगे की कार्रवाई में तमिलनाडु सरकार सर्वदलीय बैठक का आयोजन कर सकती है, जिसमें सभी राजनीतिक दलों को शामिल किया जाएगा। इस बैठक का उद्देश्य एक साझा रणनीति तैयार करना होगा ताकि जल विवाद को सुलझाया जा सके।

कुल मिलाकर, मेकेदातु परियोजना का मामला कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच जल विवाद को और जटिल बना रहा है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला और सर्वदलीय बैठक की मांग इस मुद्दे की गंभीरता को दर्शाती है। यह स्थिति आने वाले समय में दोनों राज्यों के बीच संबंधों पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकती है।

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