सोमवार, 6 जुलाई 2026भाषा: हिंदी
शुक्रवार डिजिटल
raajneeti

मेकदातु परियोजना पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय और सर्वदलीय बैठक की मांग

मेकदातु परियोजना पर सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार की याचिका खारिज कर दी है। इसके बाद, तमिलनाडु में सर्वदलीय बैठक की मांग उठी है। यह परियोजना कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच जल विवाद से जुड़ी है।

6 जुलाई 20261 घंटे पहलेस्रोत: शुक्रवार डेस्क0 बार पढ़ा गया
WXfT

हाल ही में, मेकेदातु परियोजना पर सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार की याचिका को खारिज कर दिया। यह निर्णय 2023 में लिया गया था और इससे कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच जल विवाद की स्थिति और भी जटिल हो गई है। इस परियोजना का उद्देश्य कर्नाटक में जल संसाधनों का प्रबंधन करना है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद, तमिलनाडु में राजनीतिक दलों के बीच एक सर्वदलीय बैठक की मांग उठी है। इस बैठक का उद्देश्य मेकेदातु परियोजना के खिलाफ एकजुटता दिखाना और राज्य के हितों की रक्षा करना है। तमिलनाडु सरकार ने इस परियोजना को राज्य के जल अधिकारों के लिए खतरा बताया है।

मेकदातु परियोजना का प्रस्ताव कर्नाटक सरकार द्वारा किया गया था, जिसका उद्देश्य कावेरी नदी के जल का संचयन करना है। यह परियोजना कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच लंबे समय से चल रहे जल विवाद का हिस्सा है। इस विवाद ने दोनों राज्यों के बीच कई बार तनाव पैदा किया है।

तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर अपनी निराशा व्यक्त की है, लेकिन इस मामले में कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। राज्य सरकार ने कहा है कि वह इस मुद्दे को लेकर सभी राजनीतिक दलों को एकजुट करने का प्रयास करेगी। यह बैठक राज्य के जल अधिकारों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

इस निर्णय का प्रभाव आम लोगों पर भी पड़ेगा, खासकर उन किसानों पर जो कावेरी नदी के जल पर निर्भर हैं। यदि मेकेदातु परियोजना लागू होती है, तो इससे जल वितरण में असंतुलन उत्पन्न हो सकता है। इससे तमिलनाडु के किसानों की फसल उत्पादन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

इस बीच, कर्नाटक सरकार ने मेकेदातु परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए अपनी योजना जारी रखी है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने इस परियोजना को राज्य के विकास के लिए आवश्यक बताया है। हालांकि, तमिलनाडु में राजनीतिक दलों के बीच इस मुद्दे पर असहमति बनी हुई है।

आगे क्या होगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि तमिलनाडु सरकार सर्वदलीय बैठक में क्या निर्णय लेती है। यदि सभी दल एकजुट होते हैं, तो यह कर्नाटक सरकार के खिलाफ एक मजबूत मोर्चा बना सकता है। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को लेकर आगे की सुनवाई भी महत्वपूर्ण होगी।

कुल मिलाकर, मेकेदातु परियोजना पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय और तमिलनाडु में सर्वदलीय बैठक की मांग दोनों ही जल विवाद के संदर्भ में महत्वपूर्ण घटनाएँ हैं। यह न केवल कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच के संबंधों को प्रभावित करेगा, बल्कि इससे क्षेत्र के किसानों और आम लोगों पर भी गहरा असर पड़ेगा।

टैग:
मेकदातुजल विवादतमिलनाडुकर्नाटक
WXfT

raajneeti की और ख़बरें

और पढ़ें →