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रवींद्रनाथ घोष ने बागी गुट में शामिल होकर अभिषेक पर आरोप लगाए

पूर्व मंत्री रवींद्रनाथ घोष ने बागी गुट में शामिल होने की घोषणा की है। उन्होंने ममता बनर्जी से मांग की है कि अभिषेक बनर्जी को सक्रिय राजनीति से हटाया जाए। घोष का कहना है कि तभी वे पार्टी में लौटेंगे।

12 जुलाई 20261 घंटे पहलेस्रोत: शुक्रवार डेस्क2 बार पढ़ा गया
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पूर्व मंत्री रवींद्रनाथ घोष ने हाल ही में बागी गुट में शामिल होने की घोषणा की है। यह घटना पश्चिम बंगाल में हुई है, जहाँ उन्होंने ममता बनर्जी से कुछ महत्वपूर्ण मांगें की हैं। घोष ने अभिषेक बनर्जी और आई-पैक पर चुनावी विफलता का आरोप लगाया है।

घोष ने स्पष्ट किया है कि वे तब तक पार्टी में वापस नहीं लौटेंगे जब तक ममता बनर्जी, अभिषेक बनर्जी को सक्रिय राजनीति से नहीं हटातीं। यह बयान उन्होंने उस समय दिया जब पार्टी में आंतरिक मतभेद बढ़ रहे हैं। उनके इस कदम से पार्टी के भीतर की स्थिति और भी जटिल हो गई है।

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की स्थिति पिछले कुछ समय से चुनौतीपूर्ण रही है। पार्टी को हाल के चुनावों में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है, जिससे कई नेता असंतुष्ट हो गए हैं। रवींद्रनाथ घोष का यह कदम पार्टी के भीतर के विवादों को और बढ़ा सकता है।

घोष ने अपनी बात रखते हुए कहा कि पार्टी में सुधार के लिए आवश्यक है कि ममता बनर्जी अभिषेक को हटाएं। हालांकि, इस पर पार्टी की आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी तक सामने नहीं आई है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि टीएमसी इस मुद्दे पर कैसे प्रतिक्रिया देती है।

इस घटनाक्रम का आम लोगों पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह भी एक महत्वपूर्ण सवाल है। पार्टी के भीतर के इस विवाद से कार्यकर्ताओं और समर्थकों में असंतोष बढ़ सकता है। इससे पार्टी की छवि और चुनावी संभावनाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

इस बीच, टीएमसी के अन्य नेताओं की प्रतिक्रियाएँ भी सामने आ सकती हैं। पार्टी के भीतर और भी नेता इस मुद्दे पर अपनी राय व्यक्त कर सकते हैं। इससे पार्टी की दिशा और रणनीति पर भी असर पड़ सकता है।

आगामी दिनों में यह देखना होगा कि क्या ममता बनर्जी इस मांग पर कोई कदम उठाती हैं। यदि वे अभिषेक को हटाने का निर्णय लेती हैं, तो इससे पार्टी में स्थिरता आ सकती है। अन्यथा, यह विवाद और बढ़ सकता है।

इस घटनाक्रम का महत्व इस बात में है कि यह टीएमसी की आंतरिक राजनीति को उजागर करता है। रवींद्रनाथ घोष का बागी गुट में शामिल होना पार्टी के लिए एक चेतावनी है। इससे पार्टी को अपने भीतर के मतभेदों को सुलझाने की आवश्यकता महसूस होगी।

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