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असम में डी-वोटर की पहचान और नागरिकता प्रक्रिया

असम के मुख्यमंत्री ने डी-वोटर की पहचान और नागरिकता प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी। पिछले दो वर्षों में कई लोगों को डिपोर्ट किया गया है। यह मुद्दा राज्य में नागरिकता के सवालों को लेकर महत्वपूर्ण है।

13 जुलाई 20262 घंटे पहलेस्रोत: शुक्रवार डेस्क4 बार पढ़ा गया
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असम के मुख्यमंत्री ने डी-वोटर की पहचान और नागरिकता प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी। इस प्रक्रिया के तहत, असम में ऐसे लोगों की पहचान की जाती है जिन्हें नागरिकता के लिए योग्य नहीं माना गया है। यह जानकारी हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान साझा की गई।

मुख्यमंत्री ने बताया कि डी-वोटर वे लोग होते हैं जो मतदाता सूची में शामिल नहीं हो पाए हैं या जिनकी नागरिकता की स्थिति संदिग्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह प्रक्रिया पूरी तरह से कानूनी है और इसमें सभी आवश्यक कदम उठाए जाते हैं। पिछले दो वर्षों में असम में कई लोगों को डिपोर्ट किया गया है, जो इस प्रक्रिया का हिस्सा हैं।

डी-वोटर की पहचान की प्रक्रिया का इतिहास असम में काफी पुराना है। यह मुद्दा 1985 के असम समझौते से जुड़ा हुआ है, जिसमें असम में अवैध प्रवासियों की पहचान और उन्हें वापस भेजने की बात की गई थी। इस समझौते के बाद से, नागरिकता की पहचान को लेकर कई विवाद और चर्चाएँ होती रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार इस प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी बताया कि सभी डी-वोटरों को अपनी स्थिति स्पष्ट करने का अवसर दिया जाता है। यह प्रक्रिया नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।

इस प्रक्रिया का लोगों पर गहरा प्रभाव पड़ता है। कई परिवारों को अपने नागरिकता के अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ता है, जिससे उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति प्रभावित होती है। डिपोर्ट किए गए लोगों के लिए यह एक कठिनाई भरा अनुभव होता है।

हाल ही में, असम में नागरिकता से संबंधित अन्य मुद्दों पर भी चर्चा हुई है। सरकार ने नागरिकता संशोधन अधिनियम के तहत भी कई कदम उठाए हैं। इस संदर्भ में, असम में नागरिकता की स्थिति को लेकर कई जनसभाएँ और बैठकें आयोजित की गई हैं।

आगे की प्रक्रिया में, सरकार ने डी-वोटरों की पहचान और डिपोर्टेशन की प्रक्रिया को और तेज करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही, नागरिकता की स्थिति को स्पष्ट करने के लिए एक विशेष अभियान चलाने की योजना बनाई जा रही है। यह अभियान लोगों को उनकी नागरिकता के अधिकारों के बारे में जागरूक करेगा।

इस मुद्दे की महत्वपूर्णता को देखते हुए, असम में नागरिकता की पहचान और डी-वोटर की प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। यह न केवल असम बल्कि पूरे देश में नागरिकता के सवालों को लेकर एक महत्वपूर्ण चर्चा का विषय है। सही और पारदर्शी प्रक्रिया सुनिश्चित करना सभी नागरिकों के लिए आवश्यक है।

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