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काजू के लिए बनेगा पहला अंतरराष्ट्रीय मानक

काजू के लिए पहला अंतरराष्ट्रीय मानक बनाने का निर्णय लिया गया है। इसके अलावा, धनिया और करी पत्ते समेत सात भारतीय प्रस्तावों को वैश्विक मंजूरी मिली है। यह निर्णय खाद्य मानकों के लिए कोडेक्स आयोग की बैठक में लिया गया।

14 जुलाई 20261 घंटे पहलेस्रोत: शुक्रवार डेस्क0 बार पढ़ा गया
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हाल ही में, खाद्य मानकों के लिए कोडेक्स आयोग ने काजू के लिए पहला अंतरराष्ट्रीय मानक बनाने का निर्णय लिया है। यह निर्णय 2023 में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में लिया गया। इसके साथ ही, धनिया और करी पत्ते समेत सात अन्य भारतीय प्रस्तावों को भी वैश्विक मंजूरी मिली है।

इस निर्णय के तहत काजू के मानकों को स्थापित करने का उद्देश्य वैश्विक व्यापार में सुधार करना है। काजू की गुणवत्ता और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए यह मानक महत्वपूर्ण होगा। इससे काजू उत्पादकों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिलेगी।

भारत काजू उत्पादन में एक प्रमुख देश है और यह निर्णय भारतीय काजू उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। काजू के लिए अंतरराष्ट्रीय मानक स्थापित करने से उत्पादकों को उनके उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार करने और निर्यात में वृद्धि करने का अवसर मिलेगा।

कोडेक्स आयोग ने इस बैठक में भारतीय प्रस्तावों को मंजूरी देते हुए कहा कि यह कदम वैश्विक खाद्य सुरक्षा को बढ़ावा देने में सहायक होगा। आयोग ने भारतीय उत्पादों की गुणवत्ता को मान्यता दी है और इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना है।

इस निर्णय का सीधा प्रभाव काजू उत्पादकों और किसानों पर पड़ेगा। उन्हें अब अपने उत्पादों के लिए एक अंतरराष्ट्रीय मानक का लाभ मिलेगा, जिससे उनकी बिक्री और आय में वृद्धि हो सकती है। इसके अलावा, यह निर्णय भारतीय काजू को वैश्विक बाजार में एक नई पहचान दिलाने में मदद करेगा।

इसके अलावा, काजू के मानक के साथ-साथ अन्य भारतीय प्रस्तावों की स्वीकृति से भारतीय कृषि उत्पादों की वैश्विक पहुंच में वृद्धि होगी। यह कदम भारतीय कृषि क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत है और इससे अन्य कृषि उत्पादों के लिए भी मानक स्थापित करने की संभावनाएं बढ़ेंगी।

आगे की प्रक्रिया में, काजू के मानकों को विकसित करने के लिए विशेषज्ञों की एक समिति बनाई जाएगी। यह समिति काजू की गुणवत्ता, सुरक्षा और अन्य आवश्यकताओं पर काम करेगी। इसके बाद, मानकों को लागू करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

कुल मिलाकर, काजू के लिए अंतरराष्ट्रीय मानक का निर्माण भारतीय कृषि के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह न केवल काजू उत्पादकों के लिए फायदेमंद होगा, बल्कि भारतीय कृषि उत्पादों की वैश्विक पहचान को भी मजबूत करेगा।

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