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उपराष्ट्रपति ने आरएसएस की सौवीं वर्षगांठ पर की प्रशंसा

उपराष्ट्रपति ने आरएसएस की सौवीं वर्षगांठ पर संगठन की सराहना की। उन्होंने इसे पवित्र गंगा से तुलना की। इस अवसर पर कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा की गई।

17 जुलाई 20261 घंटे पहलेस्रोत: शुक्रवार डेस्क0 बार पढ़ा गया
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हाल ही में, भारत के उपराष्ट्रपति ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सौ वर्ष पूरे होने के अवसर पर एक समारोह में भाग लिया। यह कार्यक्रम भारत के विभिन्न हिस्सों में आयोजित किया गया, जिसमें आरएसएस के सदस्यों और समर्थकों ने भाग लिया। उपराष्ट्रपति ने इस अवसर पर संगठन की उपलब्धियों और योगदानों की सराहना की।

उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन में आरएसएस की तुलना पवित्र गंगा से की। उन्होंने कहा कि जैसे गंगा जीवनदायिनी है, वैसे ही आरएसएस समाज के लिए एक महत्वपूर्ण संगठन है। उनके अनुसार, आरएसएस ने देश की संस्कृति और एकता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस समारोह में आरएसएस के इतिहास और इसके विकास पर भी चर्चा की गई।

आरएसएस की स्थापना 1925 में हुई थी और यह संगठन भारतीय समाज में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। समय के साथ, आरएसएस ने विभिन्न सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से अपने प्रभाव को बढ़ाया है। यह संगठन भारतीय राजनीति में भी सक्रिय रूप से शामिल रहा है और कई बार विवादों में भी रहा है।

उपराष्ट्रपति ने इस अवसर पर आरएसएस के कार्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि संगठन ने समाज के विभिन्न वर्गों के बीच एकता और सहयोग को बढ़ावा दिया है। उन्होंने आरएसएस के सदस्यों को उनके समर्पण और सेवा के लिए धन्यवाद दिया। यह बयान आरएसएस के प्रति सरकारी समर्थन को दर्शाता है।

इस समारोह का लोगों पर गहरा प्रभाव पड़ा है। आरएसएस के समर्थकों ने इसे एक महत्वपूर्ण अवसर माना और संगठन के प्रति अपनी निष्ठा को और मजबूत किया। वहीं, कुछ आलोचकों ने इस प्रकार के कार्यक्रमों पर सवाल उठाए हैं, लेकिन समर्थन करने वालों की संख्या अधिक है।

इस आयोजन के बाद, आरएसएस ने अपने आगामी कार्यक्रमों की योजना बनाई है, जिसमें समाज सेवा और सांस्कृतिक गतिविधियाँ शामिल होंगी। संगठन ने यह भी संकेत दिया है कि वह अपने सदस्यों को और अधिक सक्रिय रूप से शामिल करने की कोशिश करेगा।

आगे की दिशा में, आरएसएस अपने कार्यों को और विस्तारित करने की योजना बना रहा है। इसके साथ ही, संगठन ने समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए कई नए कार्यक्रमों की घोषणा की है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ये प्रयास किस प्रकार से समाज पर प्रभाव डालते हैं।

इस समारोह ने आरएसएस की सौवीं वर्षगांठ को एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बना दिया है। उपराष्ट्रपति के बयान ने संगठन की भूमिका और महत्व को उजागर किया है। इस प्रकार के आयोजनों से आरएसएस की पहचान और भी मजबूत होगी।

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