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सोनम वांगचुक का अनशन 20वें दिन भी जारी

सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल 20वें दिन में प्रवेश कर गई है। प्रदर्शन 28वें दिन भी जारी है। डॉक्टरों ने उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर चेतावनी दी है।

17 जुलाई 20261 घंटे पहलेस्रोत: शुक्रवार डेस्क0 बार पढ़ा गया
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कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का प्रदर्शन शुक्रवार को 28वें दिन भी जारी रहा। इस दौरान सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल भी 20वें दिन में प्रवेश कर गई है। यह भूख हड़ताल वांगचुक द्वारा विभिन्न मुद्दों को लेकर की जा रही है, जिसमें पर्यावरण और शिक्षा से जुड़े विषय शामिल हैं।

वांगचुक की भूख हड़ताल का उद्देश्य सरकार का ध्यान आकर्षित करना है, ताकि उनकी मांगों पर विचार किया जा सके। उन्होंने अपने अनशन के दौरान कई बार अपनी स्थिति को स्पष्ट किया है। इस दौरान, उनके समर्थकों ने भी प्रदर्शन में सक्रिय भागीदारी निभाई है।

सोनम वांगचुक एक प्रसिद्ध इंजीनियर और पर्यावरण कार्यकर्ता हैं, जो पहले भी सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय रहे हैं। उनका यह अनशन विभिन्न सामाजिक और पर्यावरणीय मुद्दों को लेकर जागरूकता फैलाने का एक प्रयास है। उनके अनशन के कारण कई लोग उनकी स्थिति पर ध्यान दे रहे हैं।

डॉक्टरों ने वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर चेतावनी दी है। उनका वजन 24 घंटे में 350 ग्राम घट गया है, जो उनकी स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय है। चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक भूख हड़ताल करना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।

इस भूख हड़ताल का प्रभाव लोगों पर भी पड़ रहा है। वांगचुक के समर्थक और आम जनता उनकी स्थिति को लेकर चिंतित हैं। कई लोग उनके समर्थन में सड़कों पर उतर आए हैं और उनकी मांगों को सही ठहराने के लिए आवाज उठा रहे हैं।

इस बीच, प्रदर्शनकारियों ने सरकार से बातचीत की मांग की है। वे चाहते हैं कि सरकार उनकी मांगों पर ध्यान दे और उचित कदम उठाए। प्रदर्शन के दौरान, कई बार पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति भी उत्पन्न हुई है।

आगे की स्थिति में, यह देखना होगा कि सरकार वांगचुक की मांगों पर कैसे प्रतिक्रिया देती है। यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो यह अनशन और भी लंबा खिंच सकता है। वांगचुक की स्थिति पर नजर रखने के लिए डॉक्टरों की टीम भी उनके साथ है।

इस अनशन और प्रदर्शन का महत्व इस बात में है कि यह समाज में जागरूकता फैलाने का एक माध्यम बन रहा है। वांगचुक की भूख हड़ताल ने कई लोगों को प्रेरित किया है कि वे भी अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाएं। यह घटना न केवल वांगचुक के लिए, बल्कि समाज के लिए भी महत्वपूर्ण है।

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