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सोनम वांगचुक को अस्पताल में भर्ती किया गया

सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाकर अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस कार्रवाई के बाद विपक्ष ने मोदी सरकार पर हमला बोला है। यह घटना शनिवार को हुई।

18 जुलाई 20262 घंटे पहलेस्रोत: शुक्रवार डेस्क0 बार पढ़ा गया
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जंतर-मंतर पर आमरण अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस ने शनिवार को प्रदर्शनस्थल से निकालकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया। यह कार्रवाई उस समय की गई जब वांगचुक ने अपनी मांगों को लेकर अनशन जारी रखा था। उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर चिंता जताई जा रही थी।

दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई के बाद विपक्ष ने मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। विपक्षी नेताओं ने इसे लोकतंत्र का उल्लंघन और असहमति की आवाज को दबाने का प्रयास बताया है। वांगचुक के अनशन का उद्देश्य जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संरक्षण के मुद्दों पर ध्यान आकर्षित करना था।

सोनम वांगचुक एक प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता और इंजीनियर हैं, जो लद्दाख के विकास और पर्यावरण संरक्षण के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने पहले भी कई बार सामाजिक और पर्यावरणीय मुद्दों पर आवाज उठाई है। उनके अनशन का यह कदम उनके द्वारा उठाए गए कई महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक है।

दिल्ली पुलिस ने इस कार्रवाई के पीछे स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया है। पुलिस का कहना है कि वांगचुक की स्थिति गंभीर हो सकती थी, इसलिए उन्हें अस्पताल में भर्ती करना आवश्यक था। इस पर वांगचुक के समर्थकों ने पुलिस की कार्रवाई को अनुचित बताया है।

इस घटना का प्रभाव आम लोगों पर भी पड़ा है। वांगचुक के समर्थकों ने उनके अनशन को समर्थन देने के लिए जंतर-मंतर पर एकत्रित होने का प्रयास किया था। अब उनकी अस्पताल में भर्ती होने के बाद, समर्थकों में चिंता और विरोध की भावना बढ़ गई है।

इस घटना के बाद, राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। कई विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को लेकर प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है। इसके अलावा, वांगचुक के स्वास्थ्य पर नजर रखने के लिए उनके समर्थक अस्पताल के बाहर एकत्रित हो रहे हैं।

आगे की स्थिति में, यह देखना होगा कि वांगचुक कब तक अस्पताल में रहेंगे और उनकी स्वास्थ्य स्थिति कैसी रहती है। साथ ही, उनके अनशन के मुद्दे पर सरकार की प्रतिक्रिया क्या होगी। यह भी महत्वपूर्ण है कि क्या सरकार उनके मुद्दों पर कोई ठोस कदम उठाएगी।

इस घटना ने एक बार फिर से पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन के मुद्दों को चर्चा में ला दिया है। सोनम वांगचुक की स्थिति ने सरकार और समाज के बीच संवाद की आवश्यकता को उजागर किया है। यह घटना लोकतांत्रिक मूल्यों और असहमति की आवाज को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।

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