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निर्मोही अखाड़ा ने सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर ट्रस्ट पुनर्गठन की मांग की

निर्मोही अखाड़ा ने राम मंदिर ट्रस्ट के पुनर्गठन के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। यह याचिका 2019 के अयोध्या फैसले के संदर्भ में है। मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में की जाएगी।

18 जुलाई 20263 घंटे पहलेस्रोत: शुक्रवार डेस्क0 बार पढ़ा गया
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निर्मोही अखाड़ा ने राम मंदिर ट्रस्ट के पुनर्गठन की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। यह याचिका 2019 में आए अयोध्या फैसले के संदर्भ में दायर की गई है। याचिका में ट्रस्ट के गठन और उसके कार्यों को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

याचिका में कहा गया है कि राम मंदिर ट्रस्ट का पुनर्गठन आवश्यक है ताकि मंदिर निर्माण और उसके प्रबंधन में पारदर्शिता बनी रहे। निर्मोही अखाड़ा का यह कदम उस समय आया है जब अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। इस ट्रस्ट के गठन को लेकर कई विवाद भी उठ चुके हैं।

2019 में सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या विवाद पर अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया था, जिसमें राम मंदिर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया गया था। इस फैसले के बाद राम मंदिर ट्रस्ट का गठन किया गया था, लेकिन निर्मोही अखाड़ा ने इस ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।

निर्मोही अखाड़ा की ओर से दायर याचिका में ट्रस्ट के सदस्यों की नियुक्ति और उनके कार्यों को लेकर भी चिंता जताई गई है। हालांकि, अभी तक इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

इस याचिका का असर अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण कार्य पर पड़ सकता है। यदि ट्रस्ट का पुनर्गठन होता है, तो इससे मंदिर निर्माण की प्रक्रिया में बदलाव आ सकता है। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के बीच इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

इस बीच, राम मंदिर निर्माण कार्य जारी है और ट्रस्ट के सदस्यों ने इसे समय पर पूरा करने का आश्वासन दिया है। निर्मोही अखाड़ा की याचिका के बाद ट्रस्ट के सदस्यों की बैठक भी होने की संभावना है।

आगे की प्रक्रिया में सुप्रीम कोर्ट इस याचिका पर सुनवाई करेगा और इसके बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी। निर्मोही अखाड़ा की मांग पर कोर्ट का निर्णय महत्वपूर्ण होगा, जो ट्रस्ट के भविष्य को प्रभावित कर सकता है।

इस मामले का महत्व इसलिए भी है क्योंकि यह अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के साथ-साथ धार्मिक और सामाजिक मुद्दों को भी छूता है। सुप्रीम कोर्ट का निर्णय इस विवाद को सुलझाने में मददगार साबित हो सकता है।

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