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बार काउंसिल ने कोर्ट में रील बनाने पर लगाई रोक

बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने कोर्ट परिसर में रील बनाने वाले वकीलों पर कार्रवाई का निर्णय लिया है। नए सोशल मीडिया दिशा-निर्देशों के तहत यह कदम उठाया गया है। यह निर्णय वकीलों के पेशेवर आचार संहिता के अनुरूप है।

19 जुलाई 20266 घंटे पहलेस्रोत: शुक्रवार डेस्क0 बार पढ़ा गया
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बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने हाल ही में एक सर्कुलर जारी किया है जिसमें कोर्ट परिसर में रील बनाने वाले वकीलों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। यह निर्णय एक नई सोशल मीडिया नीति के तहत लिया गया है। इस नीति का उद्देश्य कोर्ट के माहौल को गंभीर बनाए रखना और वकीलों के पेशेवर आचार संहिता का पालन सुनिश्चित करना है।

सर्कुलर में स्पष्ट किया गया है कि कोर्ट के भीतर रील बनाना न केवल पेशेवर आचार संहिता का उल्लंघन है, बल्कि यह न्यायालय की गरिमा को भी प्रभावित करता है। बार काउंसिल ने यह भी कहा है कि इस तरह की गतिविधियों से न्यायालय की कार्यवाही में बाधा उत्पन्न हो सकती है। वकीलों को सलाह दी गई है कि वे अपने व्यवहार को सुधारें और कोर्ट के माहौल को गंभीर बनाए रखें।

इस निर्णय का背景 यह है कि सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के कारण कई वकील कोर्ट में रील बनाने लगे थे। यह प्रवृत्ति न्यायालय की गंभीरता को कम कर रही थी और इससे न्यायिक प्रक्रिया पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता था। बार काउंसिल ने इस स्थिति को गंभीरता से लिया और उचित कदम उठाने का निर्णय किया।

बार काउंसिल के इस सर्कुलर पर कई वकीलों ने प्रतिक्रिया दी है, हालांकि सर्कुलर में किसी विशेष प्रतिक्रिया का उल्लेख नहीं किया गया है। इस निर्णय को लेकर वकीलों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। कुछ वकील इसे सकारात्मक कदम मानते हैं, जबकि अन्य इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर अंकुश के रूप में देख रहे हैं।

इस निर्णय का प्रभाव वकीलों के व्यवहार पर पड़ेगा। कोर्ट में रील बनाने की प्रवृत्ति में कमी आएगी और वकील अपनी पेशेवर जिम्मेदारियों को अधिक गंभीरता से लेंगे। इससे न्यायालय की गरिमा भी बनी रहेगी और न्यायिक प्रक्रिया में व्यवधान नहीं आएगा।

बार काउंसिल के इस सर्कुलर के बाद, वकीलों को अपने व्यवहार में बदलाव लाने की आवश्यकता होगी। यदि कोई वकील इस नीति का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। यह कार्रवाई वकील की पहचान के अनुसार की जाएगी और इससे पेशेवर अनुशासन को बनाए रखने में मदद मिलेगी।

आगे चलकर, बार काउंसिल इस नीति के प्रभाव का मूल्यांकन करेगी और आवश्यकतानुसार इसमें संशोधन कर सकती है। यदि कोई वकील बार-बार उल्लंघन करता है, तो उसे सजा भी दी जा सकती है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि न्यायालय का माहौल गंभीर बना रहे, बार काउंसिल नियमित रूप से इस दिशा में निगरानी रखेगी।

इस निर्णय का महत्व इस बात में है कि यह न्यायालय की गरिमा और वकीलों के पेशेवर आचार संहिता को बनाए रखने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। यह कदम न्यायपालिका की स्वतंत्रता और कार्यप्रणाली को सुरक्षित रखने में सहायक होगा। बार काउंसिल का यह सर्कुलर वकीलों के लिए एक चेतावनी है कि उन्हें अपने व्यवहार में सुधार लाना होगा।

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