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भारत के 11% भूजल क्षेत्र का अत्यधिक दोहन

राज्यसभा में भूजल दोहन की समस्या पर चर्चा हुई। सरकार ने सुधारों की जानकारी दी। देश के 11% भूजल क्षेत्र अत्यधिक दोहन का शिकार हैं।

20 जुलाई 202614 घंटे पहलेस्रोत: शुक्रवार डेस्क2 बार पढ़ा गया
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राज्यसभा में हाल ही में भूजल दोहन की समस्या पर चर्चा हुई। इस दौरान बताया गया कि देश के 11% भूजल क्षेत्र जरूरत से ज्यादा दोहन का शिकार हैं। यह स्थिति देश के विभिन्न हिस्सों में जल संकट को बढ़ा रही है। यह चर्चा उस समय हुई जब जल संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है।

सरकार ने इस मुद्दे पर जानकारी दी कि भूजल के अत्यधिक दोहन के कारण कई क्षेत्रों में जल स्तर गिर रहा है। इसके परिणामस्वरूप कृषि और पेयजल की उपलब्धता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। सरकार ने यह भी बताया कि सुधार के लिए कई योजनाएं लागू की गई हैं। इन योजनाओं के तहत जल संरक्षण और पुनर्भरण पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

भूजल का अत्यधिक दोहन एक गंभीर समस्या बन चुकी है, जो न केवल पर्यावरण बल्कि लोगों की जीवनशैली को भी प्रभावित कर रही है। पिछले कुछ वर्षों में, जलवायु परिवर्तन और जनसंख्या वृद्धि के कारण जल संसाधनों पर दबाव बढ़ गया है। कई राज्यों में सूखे और जल संकट की घटनाएं बढ़ी हैं, जिससे कृषि उत्पादन पर भी असर पड़ा है।

सरकार ने इस मुद्दे पर अपनी चिंताओं को व्यक्त किया है और सुधारात्मक कदम उठाने की बात की है। अधिकारियों ने बताया कि जल संरक्षण के लिए विभिन्न योजनाएं और कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों के तहत जल पुनर्भरण और भूजल के सतत प्रबंधन पर जोर दिया जा रहा है।

भूजल संकट का प्रभाव आम लोगों पर भी पड़ रहा है। कई क्षेत्रों में पानी की कमी के कारण लोग परेशान हैं। कृषि में पानी की कमी से फसल उत्पादन प्रभावित हो रहा है, जिससे किसानों की आय पर भी असर पड़ रहा है। इसके अलावा, पेयजल की उपलब्धता भी कई स्थानों पर गंभीर रूप से प्रभावित हुई है।

इस समस्या के समाधान के लिए सरकार ने कई नई पहलों की घोषणा की है। जल संरक्षण के लिए जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इसके साथ ही, भूजल प्रबंधन के लिए तकनीकी सहायता भी प्रदान की जा रही है। यह प्रयास जल संकट को कम करने में मदद कर सकते हैं।

आगे की योजना के तहत, सरकार ने जल संरक्षण के लिए एक व्यापक रणनीति तैयार करने की बात की है। इस रणनीति में भूजल के सतत उपयोग और पुनर्भरण पर ध्यान दिया जाएगा। इसके अलावा, स्थानीय समुदायों को भी जल संरक्षण में शामिल किया जाएगा।

इस मुद्दे की गंभीरता को देखते हुए, भूजल दोहन की समस्या का समाधान करना अत्यंत आवश्यक है। यह न केवल पर्यावरण के लिए बल्कि देश की आर्थिक स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण है। यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो जल संकट और भी गंभीर हो सकता है।

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