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पुंछ में भूस्खलन से सात लोगों की मौत

जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में भूस्खलन से सात लोगों की जान गई। यह घटना मंडी तहसील के लोरन ब्लॉक में हुई। भारी बारिश के कारण यह भूस्खलन हुआ।

20 जुलाई 202612 घंटे पहलेस्रोत: शुक्रवार डेस्क6 बार पढ़ा गया
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जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में भारी बारिश के चलते मंडी तहसील के लोरन ब्लॉक के पीर पंजाल पहाड़ियों में स्थित दोमेल ढोक क्षेत्र में भूस्खलन हुआ। इस भूस्खलन के परिणामस्वरूप सात लोगों की मौत हो गई। यह घटना हाल ही में हुई, जब क्षेत्र में लगातार बारिश हो रही थी।

भूस्खलन की चपेट में आने वाले लोग स्थानीय निवासी थे, जो अपने दैनिक कार्यों में व्यस्त थे। घटना के समय बारिश की तीव्रता अधिक थी, जिससे मिट्टी और चट्टानों के खिसकने की संभावना बढ़ गई थी। स्थानीय प्रशासन ने तुरंत बचाव कार्य शुरू किया, लेकिन तब तक कई लोग इसकी चपेट में आ चुके थे।

भूस्खलन की घटनाएं जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी क्षेत्रों में आम हैं, विशेषकर मानसून के दौरान। पिछले कुछ वर्षों में भी इस प्रकार की कई घटनाएं हुई हैं, जिनमें जान-माल का नुकसान हुआ है। भूस्खलन के कारणों में भारी बारिश, भौगोलिक संरचना और मानव गतिविधियों का योगदान होता है।

स्थानीय प्रशासन ने घटना के बाद बचाव कार्य में तेजी लाई है। हालांकि, अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन स्थानीय लोगों में चिंता और भय का माहौल है। प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को सहायता प्रदान करने का आश्वासन दिया है।

इस भूस्खलन के कारण स्थानीय लोगों पर गहरा असर पड़ा है। कई परिवारों ने अपने प्रियजनों को खो दिया है, जिससे उनके जीवन में एक बड़ा खालीपन आ गया है। इसके अलावा, स्थानीय अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हुई है, क्योंकि यह क्षेत्र पर्यटन और कृषि पर निर्भर करता है।

भूस्खलन के बाद, प्रशासन ने क्षेत्र में सुरक्षा उपायों को बढ़ाने का निर्णय लिया है। इसके तहत, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों की पहचान की जाएगी और आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। इसके अलावा, स्थानीय लोगों को जागरूक करने के लिए कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

आगे की कार्रवाई में, प्रशासन प्रभावित परिवारों को सहायता प्रदान करने के लिए योजनाएं बना रहा है। इसके साथ ही, भूस्खलन की संभावनाओं को कम करने के लिए दीर्घकालिक उपायों पर भी विचार किया जाएगा। यह सुनिश्चित करने के लिए कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, विशेषज्ञों की सलाह ली जाएगी।

इस घटना ने एक बार फिर भूस्खलन के खतरों को उजागर किया है। जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी क्षेत्रों में सुरक्षा और बचाव उपायों की आवश्यकता को रेखांकित करता है। यह घटना स्थानीय समुदाय के लिए एक दुखद यादगार बन गई है, और इसके प्रभाव लंबे समय तक महसूस किए जाएंगे।

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