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जम्मू में भूस्खलन से तीन की मौत, चार घायल

डोडा-जम्मू हाईवे पर भूस्खलन से तीन लोगों की मौत हुई। हादसे में चार लोग घायल भी हुए हैं। यह घटना सोमवार सुबह रागी नाले के पास हुई।

20 जुलाई 202611 घंटे पहलेस्रोत: शुक्रवार डेस्क6 बार पढ़ा गया
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डोडा-जम्मू नेशनल हाईवे-244 पर सोमवार सुबह रागी नाले के पास पहाड़ से मलबा गिरने की घटना हुई। इस भूस्खलन में डोडा से जम्मू जा रही एक बस और दो टैक्सियां चपेट में आ गईं। हादसे के परिणामस्वरूप तीन लोगों की मौत हो गई और चार अन्य लोग घायल हो गए। यह घटना स्थानीय लोगों के लिए एक बड़ा झटका है।

भूस्खलन की घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और बचाव दल तुरंत मौके पर पहुंचे। घायलों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मृतकों की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है। इस घटना ने क्षेत्र में सुरक्षा और बुनियादी ढांचे की स्थिति पर सवाल उठाए हैं।

जम्मू-कश्मीर में भूस्खलन की घटनाएं अक्सर होती हैं, खासकर बारिश के मौसम में। पहाड़ों से गिरने वाले मलबे से सड़कें अवरुद्ध हो जाती हैं, जिससे यातायात प्रभावित होता है। यह घटना भी इसी संदर्भ में आई है, जहां मौसम की स्थिति ने स्थिति को और गंभीर बना दिया।

स्थानीय प्रशासन ने घटना के बाद एक बयान जारी किया है, जिसमें उन्होंने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की है। प्रशासन ने यह भी कहा है कि वे घायलों के इलाज की पूरी व्यवस्था कर रहे हैं। इसके साथ ही, भूस्खलन के कारणों की जांच करने का आश्वासन भी दिया गया है।

इस भूस्खलन से प्रभावित लोगों में गहरा सदमा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं उनके जीवन को खतरे में डालती हैं। इसके अलावा, कई घरों को भी नुकसान पहुंचा है, जिससे लोग बेघर हो सकते हैं।

इस घटना के बाद, स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा उपायों को बढ़ाने का निर्णय लिया है। भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में चेतावनी संकेतक लगाने की योजना बनाई जा रही है। इसके अलावा, भूस्खलन के कारणों की जांच के लिए विशेषज्ञों की टीम भी भेजी जाएगी।

आगे की कार्रवाई में, प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य शुरू करने का आश्वासन दिया है। इसके साथ ही, भूस्खलन के कारणों की गहन जांच की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। स्थानीय लोगों को भी सुरक्षा उपायों के प्रति जागरूक किया जाएगा।

इस घटना ने एक बार फिर से भूस्खलन की समस्या को उजागर किया है, जो जम्मू-कश्मीर में एक गंभीर चिंता का विषय है। यह घटना न केवल मानव जीवन को प्रभावित करती है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचे पर भी नकारात्मक प्रभाव डालती है। प्रशासन को इस मुद्दे पर गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है।

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