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क्वाड बैठक में भारत ने स्वतंत्र हिंद-प्रशांत क्षेत्र की प्रतिबद्धता दोहराई

भारत ने क्वाड बैठक में स्वतंत्र हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस संदर्भ में महत्वपूर्ण बातें साझा कीं। यह बैठक मनीला में आयोजित की गई थी।

22 जुलाई 20262 घंटे पहलेस्रोत: शुक्रवार डेस्क0 बार पढ़ा गया
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भारत ने हाल ही में मनीला में आयोजित क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक में स्वतंत्र हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। इस बैठक में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भाग लिया। उन्होंने क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता के लिए भारत की भूमिका पर जोर दिया।

बैठक के दौरान, जयशंकर ने स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि सभी देशों को इस क्षेत्र में सहयोग और समन्वय बढ़ाने की आवश्यकता है। इसके साथ ही, उन्होंने क्षेत्रीय चुनौतियों का सामना करने के लिए एकजुटता की आवश्यकता पर भी बल दिया।

क्वाड, जिसमें भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं, का उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा और विकास को बढ़ावा देना है। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब क्षेत्र में कई भू-राजनीतिक मुद्दे उत्पन्न हो रहे हैं। इन मुद्दों के चलते क्षेत्र की स्थिरता और सुरक्षा को खतरा हो सकता है।

इस बैठक में भाग लेते हुए, जयशंकर ने कहा कि सभी देशों को एकजुट होकर काम करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि भारत इस क्षेत्र में शांति और समृद्धि के लिए प्रतिबद्ध है। हालांकि, आधिकारिक बयान में अन्य देशों की प्रतिक्रियाओं का उल्लेख नहीं किया गया।

इस बैठक का प्रभाव स्थानीय लोगों पर भी पड़ सकता है। क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता के प्रयासों से व्यापार और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिल सकता है। इससे स्थानीय समुदायों को भी लाभ होगा।

क्वाड बैठक के बाद, भारत और अन्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए कई पहल की जा सकती हैं। यह बैठक भविष्य में होने वाले संवादों और सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

आगे की कार्रवाई में, क्वाड देशों के बीच नियमित बैठकें और संवाद स्थापित करने की संभावना है। इससे क्षेत्रीय सुरक्षा और विकास के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया जा सकेगा।

कुल मिलाकर, यह बैठक स्वतंत्र हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। भारत की प्रतिबद्धता से यह स्पष्ट होता है कि वह क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा को प्राथमिकता देता है। यह न केवल भारत के लिए, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत है।

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