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जयशंकर ने अंतरराष्ट्रीय कानून में बदलाव की आवश्यकता पर जोर दिया

भारत के विदेश मंत्री जयशंकर ने अंतरराष्ट्रीय कानून में लोकतांत्रिक बदलाव की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने वैश्विक दक्षिण की प्राथमिकताओं को भी उजागर किया। यह बयान बदलती वैश्विक स्थिति के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।

24 जुलाई 20261 घंटे पहलेस्रोत: शुक्रवार डेस्क0 बार पढ़ा गया
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भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हाल ही में अंतरराष्ट्रीय कानून में बदलाव की आवश्यकता पर जोर दिया। यह बयान उन्होंने एक सम्मेलन के दौरान दिया, जिसमें उन्होंने वैश्विक दक्षिण की प्राथमिकताओं को भी रेखांकित किया। जयशंकर ने कहा कि बदलती दुनिया में अंतरराष्ट्रीय कानून को अधिक लोकतांत्रिक होना चाहिए।

जयशंकर ने अपने बयान में वैश्विक दक्षिण के देशों की आवाज़ को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि इन देशों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अधिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। इसके साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान वैश्विक व्यवस्था में बदलाव की आवश्यकता है ताकि सभी देशों की आवश्यकताओं का ध्यान रखा जा सके।

इस संदर्भ में, जयशंकर ने यह भी उल्लेख किया कि वैश्विक दक्षिण के देशों को विकास और समृद्धि के लिए एकजुट होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह समय है कि इन देशों को एक साथ मिलकर अपनी आवाज़ उठानी चाहिए। इससे न केवल उनके हितों की रक्षा होगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी एक संतुलित दृष्टिकोण स्थापित होगा।

जयशंकर के इस बयान पर भारत सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत हमेशा से अंतरराष्ट्रीय कानून में सुधार के लिए प्रतिबद्ध रहा है। मंत्रालय ने यह भी कहा कि भारत वैश्विक दक्षिण के देशों के साथ मिलकर काम करने के लिए तैयार है।

इस बयान का लोगों पर प्रभाव भी देखा जा रहा है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय कानून में बदलाव होता है, तो यह विकासशील देशों के लिए फायदेमंद होगा। इससे वैश्विक स्तर पर न्याय और समानता की भावना को बढ़ावा मिलेगा।

इससे पहले भी कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत ने वैश्विक दक्षिण की प्राथमिकताओं को उठाया है। जयशंकर ने इस संदर्भ में संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों में सुधार की आवश्यकता पर भी बल दिया है। यह मुद्दा वैश्विक राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

आगे की कार्रवाई के रूप में, जयशंकर ने सुझाव दिया कि सभी देशों को एक साथ मिलकर एक नई वैश्विक व्यवस्था की दिशा में काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह समय है कि सभी देश अपने हितों को ध्यान में रखते हुए एकजुट हों। इससे एक नई और अधिक समावेशी वैश्विक व्यवस्था का निर्माण किया जा सकेगा।

इस प्रकार, जयशंकर का यह बयान वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण है। यह न केवल भारत की स्थिति को स्पष्ट करता है, बल्कि वैश्विक दक्षिण के देशों के लिए भी एक नई दिशा प्रदान करता है। इस बदलाव की आवश्यकता को समझना और स्वीकार करना सभी देशों के लिए आवश्यक है।

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