फिल्म ‘आदिपुरूष’ के लेखक मनोज मुंतशिर ने तीन साल बाद इस फिल्म की ट्रोलिंग पर अपनी भावनाएं साझा की हैं। उन्होंने कहा कि जब वह पीछे मुड़कर देखते हैं, तो उन्हें शर्म आती है। यह बयान हाल ही में एक साक्षात्कार के दौरान दिया गया।
मनोज मुंतशिर ने इस दौरान फिल्म की रिलीज के बाद की प्रतिक्रियाओं पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि फिल्म को लेकर जो नकारात्मक टिप्पणियाँ आईं, वे उनके लिए एक सीख के रूप में रही हैं। मुंतशिर ने यह भी बताया कि उन्होंने इस अनुभव से काफी कुछ सीखा है।
‘आदिपुरूष’ एक महाकाव्य फिल्म है, जो भारतीय पौराणिक कथाओं पर आधारित है। फिल्म की रिलीज के समय इसे काफी विवादों का सामना करना पड़ा था। इसके संवाद, विशेष प्रभाव और कहानी को लेकर दर्शकों और आलोचकों से मिश्रित प्रतिक्रियाएं मिली थीं।
मनोज मुंतशिर ने अपने बयान में यह भी कहा कि वह इस फिल्म के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझते हैं। उन्होंने यह स्वीकार किया कि फिल्म की कुछ बातें दर्शकों को पसंद नहीं आईं। इस पर उन्होंने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि वह इस अनुभव को सकारात्मक रूप में लेना चाहते हैं।
इस फिल्म की ट्रोलिंग ने दर्शकों और फिल्म उद्योग के बीच एक चर्चा को जन्म दिया। कई लोगों ने फिल्म की गुणवत्ता और उसके संवादों पर सवाल उठाए। यह ट्रोलिंग न केवल फिल्म के लिए, बल्कि इसके निर्माताओं के लिए भी एक चुनौती बन गई थी।
फिल्म ‘आदिपुरूष’ के बाद मनोज मुंतशिर ने अन्य परियोजनाओं पर ध्यान केंद्रित किया है। उन्होंने कहा कि वह अपने अनुभवों से सीखते हुए आगे बढ़ना चाहते हैं। इसके साथ ही, वह भविष्य में और बेहतर काम करने का प्रयास करेंगे।
आगे बढ़ते हुए, मनोज मुंतशिर ने अपने प्रशंसकों से अपील की है कि वे उनके काम को समझें और समर्थन करें। उन्होंने कहा कि वह अपने अनुभवों को साझा करते रहेंगे ताकि अन्य लोग भी उनसे सीख सकें।
इस प्रकार, मनोज मुंतशिर का यह बयान फिल्म ‘आदिपुरूष’ के प्रति उनके दृष्टिकोण को स्पष्ट करता है। यह न केवल उनके व्यक्तिगत अनुभव को दर्शाता है, बल्कि फिल्म उद्योग में आलोचना और सुधार के महत्व को भी रेखांकित करता है।
