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भदोही को फिर से संत रविदास नगर कहा जाएगा: सीएम

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भदोही को संत रविदास नगर नाम देने की घोषणा की। यह घोषणा संत रविदास की 650वीं जयंती के अवसर पर की गई। कार्यक्रम का आयोजन सीर गोवर्धन स्थित संत रविदास जन्मस्थली पर होगा।

29 जुलाई 20261 घंटे पहलेस्रोत: शुक्रवार डेस्क0 बार पढ़ा गया
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भदोही को फिर से संत रविदास नगर कहे जाने की घोषणा की है। यह घोषणा बुधवार को सीर गोवर्धन स्थित संत रविदास जन्मस्थली पर आयोजित होने वाले भव्य कार्यक्रम के दौरान की जाएगी। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री स्वयं शामिल होंगे।

इस कार्यक्रम का आयोजन संत शिरोमणि गुरु रविदास की 650वीं जयंती के उपलक्ष्य में किया जा रहा है। संत रविदास का जन्मस्थान सीर गोवर्धन है, जो भदोही जिले में स्थित है। यह आयोजन समाज में समरसता और एकता का संदेश देने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

संत रविदास भारतीय समाज में एक महत्वपूर्ण धार्मिक और सामाजिक व्यक्तित्व माने जाते हैं। उनके विचार और शिक्षाएं समाज में समानता और भाईचारे का संदेश देती हैं। इस जयंती के अवसर पर उनके योगदान को याद करना और उनके विचारों को आगे बढ़ाना आवश्यक है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस अवसर पर कहा है कि संत रविदास के विचारों को समाज में फैलाना चाहिए। उन्होंने समरसता संकल्प अभियान की भी शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य समाज में एकता और समरसता को बढ़ावा देना है।

इस घोषणा का लोगों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है। भदोही को संत रविदास नगर के नाम से जाना जाने से स्थानीय लोगों में गर्व का अनुभव होगा। यह निर्णय संत रविदास के अनुयायियों के लिए भी एक महत्वपूर्ण क्षण है।

इस कार्यक्रम के अलावा, राज्य सरकार ने संत रविदास के विचारों को फैलाने के लिए विभिन्न योजनाओं की घोषणा की है। इन योजनाओं में सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन और शिक्षा के क्षेत्र में सुधार शामिल हैं।

आगे की प्रक्रिया में, इस कार्यक्रम के सफल आयोजन के बाद संत रविदास के विचारों को और अधिक लोगों तक पहुँचाने के लिए विभिन्न गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी। इसके साथ ही, समरसता संकल्प अभियान के तहत विभिन्न समुदायों के बीच संवाद और सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा।

इस घोषणा और कार्यक्रम का महत्व समाज में समरसता और एकता को बढ़ावा देने में है। संत रविदास की जयंती मनाने का यह अवसर न केवल उनके विचारों को याद करने का है, बल्कि समाज में एकता और भाईचारे का संदेश देने का भी है।

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